नई दिल्ली: पूर्णिया से सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने संसद भवन में संविधान के 75 वर्षों की गौरवशाली यात्रा पर चर्चा करते हुए समाज, शिक्षा, स्वास्थ्य, आरक्षण और देश के अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर कड़ा रुख अपनाया। अपने संबोधन में उन्होंने भारत की सांस्कृतिक विरासत और संविधान को गीता के समान बताया और वसुधैव कुटुम्बकम और सर्वधर्म समभाव की भावना को भारत के मूल दर्शन और न्यू ह्यूमेनिज्म का आधार बताया।
सांसद पप्पू यादव ने दिनकर की कविता का हवाला देते हुए कहा कि भारत का दर्शन न्यू ह्यूमेनिज्म और न्यू मोरेलिटी पर आधारित है, जो समाज में समानता और समरसता की दिशा में काम करता है। इसके बाद उन्होंने आरक्षण को 67 प्रतिशत तक बढ़ाने की पुरजोर मांग की। उनका कहना था कि अगर निजी नौकरियों में आरक्षण लागू किया जाए, तो रोजगार के अवसरों में 80 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है। इसके साथ ही उन्होंने ठेकेदारी प्रथा में एससी, एसटी और दलित समुदाय को प्राथमिकता देने का भी सुझाव रखा।
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सांसद ने सरकारी नौकरियों और सेवाओं को अधिक प्रभावशाली और सुलभ बनाने की दिशा में भी बात की। पप्पू यादव ने यह भी कहा कि आरक्षण को समय, स्थान और परिस्थिति के अनुसार पुनः परिभाषित करने की आवश्यकता है, ताकि यह समाज के हर वर्ग तक प्रभावी रूप से पहुंचे।
इसी दौरान उन्होंने बिहार में बीपीएससी छात्र पर लाठीचार्ज की घटना की कड़ी निंदा की और इसे युवाओं के अधिकारों का उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं केवल देश में असंतोष और असुरक्षा की भावना को बढ़ाती हैं। सांसद ने शिक्षा और स्वास्थ्य के बढ़ते निजीकरण पर भी सवाल उठाए और “वन नेशन, फ्री एजुकेशन, फ्री हेल्थ” की मांग की स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर चिंता जताते हुए पप्पू यादव ने कहा कि देश में 90 प्रतिशत बीमारियां दूषित पानी के कारण होती हैं, और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाने की आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जनता को ऐसा अनाज और भोजन मुहैया कराया जा रहा है, जो उनकी सेहत के लिए हानिकारक है।
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धर्म, जाति, भाषा और रंग के आधार पर देश के विभाजन पर भी उन्होंने चिंता जताई और कहा कि देश तभी प्रगति कर सकता है, जब सभी समुदाय एकजुट होकर काम करें। सांसद पप्पू यादव ने बिजली क्षेत्र में निजीकरण को खत्म करने की भी मांग की और बिहार समेत देश के विभिन्न हिस्सों में युवाओं और श्रमिकों के साथ हो रहे भेदभाव और अत्याचार पर सख्त रुख अपनाया। अपने संबोधन के अंत में पप्पू यादव ने संविधान की मूल भावनाओं की रक्षा करने और समाज के कमजोर तबकों को न्याय दिलाने की बात की, ताकि भारत का लोकतंत्र सशक्त और समृद्ध हो सके।




















