बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव (Pappu Yadav on Nobel) एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार स्थानीय मुद्दों के बजाय वैश्विक विमर्श को लेकर। सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले पप्पू यादव ने नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर ऐसी टिप्पणी कर दी, जिसने भारतीय राजनीति के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय राजनीति का भी ध्यान खींच लिया। उनका कहना है कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद को नोबेल का दावेदार मान सकते हैं, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनसे कहीं आगे हैं।

पप्पू यादव ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि डोनाल्ड ट्रंप को कम से कम आठ नोबेल शांति पुरस्कार मिलने चाहिए, जबकि मोदी जी दुनिया में उनसे भी अधिक दावेदार हैं और उन्हें बारह तक नोबेल शांति पुरस्कार दिए जा सकते हैं। यह टिप्पणी चुनावी माहौल से दूर, एक तरह का तंज भी थी और एक तरह का राजनीतिक विमर्श भी।
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डोनाल्ड ट्रंप अपने कार्यकाल के दौरान कई बार खुद को इतिहास का सबसे बड़ा ‘शांति दूत’ बताते रहे। उनका दावा था कि उन्होंने आठ बड़े युद्धों को रोककर दुनिया को अस्थिरता से बचाया। इतना ही नहीं, उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को कम करने का श्रेय भी खुद को दिया और इसे कूटनीति की ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। ट्रंप का यह भी कहना रहा है कि नोबेल समिति ने उनके साथ न्याय नहीं किया, जबकि वे इतिहास में अकेले ऐसे व्यक्ति हैं जो शांति पुरस्कार के सबसे बड़े दावेदार हैं।
पप्पू यादव ने इसी दावे को आधार बनाकर मोदी पर यह तंज कसा। दिलचस्प यह है कि यादव का यह शैलीगत वार नया नहीं है। वे पहले भी अंतरराष्ट्रीय नेताओं और भारतीय प्रधानमंत्री की तुलना कर चुके हैं। हाल ही में उन्होंने वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का उदाहरण देकर मोदी की राजनीतिक स्थिति पर कटाक्ष किया था। उस पोस्ट में उन्होंने कहा था कि मादुरो निडर हैं और मोदी को भी डरने की आवश्यकता नहीं। यादव ने यह भी कहा कि भारत की सैन्य नींव पहले के प्रधानमंत्रियों और वैज्ञानिक नेतृत्व ने इतनी मजबूत बना दी है कि कोई ट्रंप जैसी ताकत भारत को डरा नहीं सकती।






















