संसद का बहुप्रतीक्षित शीतकालीन सत्र (Parliament Winter Session) आज से शुरू हो रहा है और सत्र शुरू होने से पहले ही राजनीतिक तापमान तेज हो गया है। विपक्ष ने साफ संकेत दे दिए हैं कि यह सत्र शांत नहीं रहने वाला, क्योंकि दिल्ली में हाल ही में हुए आत्मघाती बम धमाके, दिल्ली-एनसीआर में खतरनाक स्तर तक पहुंच चुके प्रदूषण और देश के 12 राज्यों व केंद्रशासित क्षेत्रों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर वह सरकार को कटघरे में खड़ा करेगा। इन मुद्दों पर तत्काल चर्चा की मांग उठाकर विपक्ष ने सरकार को घेरने की रणनीति तय की है।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार पहले ही बता चुकी है कि यह सत्र उसके सुधारवादी एजेंडे को आगे बढ़ाने वाला होगा। असैन्य परमाणु क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने से जुड़े प्रस्तावित विधेयक सहित कुल 13 बिल इस सत्र में लाए जाने की तैयारी है। तीन सप्ताह तक चलने वाले इस सत्र में कुल 15 बैठकें होंगी और उम्मीद की जा रही है कि सरकार इस बार आर्थिक सुधारों को लेकर तेज़ी से आगे बढ़ेगी, खासकर बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की ऐतिहासिक जीत के बाद उसका आत्मविश्वास और बढ़ गया है।
सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार सुबह 10 बजे संसद के हंस द्वार पर मीडिया को संबोधित करेंगे, जिसमें वह मौजूदा सत्र के दौरान सरकार की विकास प्राथमिकताओं और विधायी एजेंडे की जानकारी देंगे। यह संबोधन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सरकार विपक्ष को संदेश देना चाहती है कि वह चर्चा से भागने वाली नहीं है, बल्कि नियमों के दायरे में हर मुद्दे पर बहस को तैयार है।
रविवार को हुई सर्वदलीय बैठक में सरकार ने विपक्ष से सत्र को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग की अपील की। बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सरकार की ओर से नेतृत्व किया, जबकि भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और अर्जुन राम मेघवाल भी मौजूद रहे। इस बैठक में विपक्षी खेमे में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और माकपा सहित 36 दलों के 50 से ज्यादा नेताओं ने हिस्सा लिया। विपक्ष ने बैठक में एकजुट होकर सरकार के सामने अपनी प्राथमिकताओं को रखा और कहा कि दिल्ली बम धमाका, प्रदूषण संकट और SIR जैसे मुद्दों को टाला नहीं जा सकता।


















