Patna Airport Runway: पटना एयरपोर्ट को लेकर राज्यसभा में एक बार फिर गंभीर बहस छिड़ गई है। कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने पटना के जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रनवे को लेकर जो सवाल उठाए, उसने सुरक्षा और एयरपोर्ट की क्षमता, दोनों पर नई चर्चा छेड़ दी है। बिहार की राजधानी होने के बावजूद पटना एयरपोर्ट देश के सबसे चुनौतीपूर्ण एयरपोर्ट में गिना जाता है और विशेषज्ञ लगातार इसकी सीमित रनवे लंबाई पर चिंता जताते रहे हैं। अब केंद्र सरकार ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि रनवे विस्तार की सबसे बड़ी बाधा बिहार सरकार द्वारा जमीन उपलब्ध न कराना है।
अखिलेश सिंह ने सदन में बताया कि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार एयरपोर्ट के रनवे की लंबाई करीब 2300 मीटर होनी चाहिए, लेकिन पटना का मौजूदा रनवे इससे लगभग 750 फीट छोटा है। उन्होंने पुराने हादसों और सुरक्षा जोखिमों का हवाला देते हुए मंत्री से पूछा कि आखिर रनवे विस्तार की दिशा में अब तक कोई ठोस प्रगति क्यों नहीं हुई। सांसद का तर्क था कि जब यात्री संख्या हर साल रिकॉर्ड तोड़ बढ़ रही है और नया टर्मिनल एक करोड़ यात्रियों की क्षमता के साथ तैयार हो चुका है, तब सुरक्षा और सुविधाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
जवाब में केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री के. राममोहन नायडू ने साफ कहा कि पटना देश का महत्वपूर्ण एयरपोर्ट है, जहां ए320 जैसे बड़े विमानों का संचालन लोड पेनल्टी और सुरक्षा सीमाओं को ध्यान में रखते हुए ही किया जा रहा है। मंत्री ने बताया कि पटना एयरपोर्ट के दोनों ओर बड़े अवरोध मौजूद हैं। एक तरफ रेलवे ट्रैक और दूसरी तरफ जु पार्क व बेल टावर जैसे संरक्षित क्षेत्र। ऐसे में रनवे विस्तार केवल तभी संभव है जब राज्य सरकार पर्याप्त भूमि उपलब्ध कराए, जिसकी मांग केंद्र कई बार कर चुका है।
मंत्री के अनुसार, पटना एयरपोर्ट की रनवे सीमा न सिर्फ विमान संचालन को प्रभावित करती है बल्कि इंटरनेशनल फ्लाइट शुरू करने की संभावनाओं को भी रोकती है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानें तभी संभव होंगी जब रनवे पर्याप्त लंबाई का हो, जबकि वर्तमान स्थिति में यह तकनीकी मानकों को पूरा नहीं करता। केंद्र बार-बार जमीन मांग चुका है, लेकिन राज्य सरकार के पास से सकारात्मक जवाब नहीं मिला है, जिससे पूरा प्रोजेक्ट वर्षों से अटका हुआ है।
अखिलेश सिंह ने नाइट लैंडिंग फैसिलिटी की कमी पर भी सवाल उठाया और कहा कि इतनी बड़ी यात्री संख्या वाले एयरपोर्ट में यह सुविधा न होना गंभीर कमी है। मंत्री का कहना था कि नाइट लैंडिंग सहित सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं, लेकिन इसके लिए विस्तार जरूरी है और विस्तार बिना जमीन के संभव नहीं। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट आसमान में नहीं बनता, जमीन पर बनता है और जमीन राज्य सरकार का विषय है।
यह विवाद अब राजनीतिक रूप लेता दिख रहा है। एक ओर केंद्र सरकार कह रही है कि सारी बाधा राज्य सरकार की ओर से जमीन उपलब्ध न कराने की वजह से है। दूसरी ओर, विपक्षी दल यह तर्क दे रहे हैं कि केंद्र स्पष्ट समाधान देने के बजाय औपचारिक जवाबों में ही उलझा हुआ है। विशेषज्ञ मानते हैं कि पटना एयरपोर्ट की रनवे सीमा केवल भविष्य के विस्तार को ही नहीं रोक रही, बल्कि मौजूदा यात्रियों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर रही है।
पटना एयरपोर्ट पिछले कई सालों से देश के सबसे व्यस्त लेकिन सबसे समस्याग्रस्त हवाई अड्डों में गिना जाता है। नई सुविधाओं के बावजूद रनवे की लंबाई का मुद्दा आज भी जस का तस है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र और राज्य की यह खींचतान कब खत्म होगी और आखिर कब पटना एयरपोर्ट को वह क्षमता मिलेगी जो बिहार की बढ़ती हवाई यात्री संख्या और विकास योजनाओं के अनुरूप हो।





















