Patna CWC Meeting: देश की राजनीति का केंद्र रविवार को पटना बन गया, जहां आजादी के बाद पहली बार कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की ऐतिहासिक बैठक आयोजित हुई। यह बैठक केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि आने वाले बिहार विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस का बड़ा शक्ति प्रदर्शन मानी जा रही है। सुबह 10 बजे शुरू होकर शाम 4 बजे तक चलने वाली इस बैठक में देशभर के 170 से अधिक शीर्ष नेता, तीन मुख्यमंत्री और कई वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल होंगे।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी के साथ हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, कर्नाटक के सिद्धारमैया और तेलंगाना के रेवंत रेड्डी की मौजूदगी ने इस बैठक को राष्ट्रीय स्तर पर खास महत्व दिया। पार्टी की रणनीति साफ है कि 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले जनता तक मजबूत संदेश पहुंचाया जाए और भाजपा की नीतियों को चुनौती दी जाए।
कांग्रेस को भरोसा है कि जैसे 2023 में तेलंगाना चुनाव से पहले हैदराबाद में हुई CWC मीटिंग का सकारात्मक असर वहां की सत्ता तक पहुंचने में मददगार रहा, वैसे ही पटना की यह बैठक भी संगठन को ऊर्जा देगी। बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि इस मीटिंग से पार्टी कार्यकर्ताओं में नई ताकत का संचार होगा और जनता को कांग्रेस का विकल्प प्रस्तुत किया जाएगा।
बैठक का स्थल, सदाकत आश्रम, अपने आप में ऐतिहासिक है। यहां 30,000 स्क्वायर फीट में एयर कंडीशन्ड जर्मन हैंगर टेंट लगाया गया, जिसमें विभिन्न राज्यों की संस्कृति को दर्शाने वाली पेंटिंग्स और कोलकाता से मंगाए गए झूमर तथा डिजिटल लाइट्स ने माहौल को भव्य बना दिया। नेताओं और प्रतिनिधियों के लिए पटना के बड़े होटलों में 175 कमरे आरक्षित किए गए, जबकि पूरे शहर में 300 से अधिक कमरे बुक किए गए।
नवरात्र के कारण मेन्यू पूरी तरह शाकाहारी रखा गया। राहुल गांधी के लिए बिहार का प्रसिद्ध व्यंजन लिट्टी-चोखा विशेष रूप से तैयार कराया गया, जिसने बैठक को और भी चर्चा का विषय बना दिया। इसके अलावा बैठक में एक अहम विधेयक भी पेश और पारित किया गया, जिसके जरिए कांग्रेस बिहार में जनता से सीधे जुड़ने और भाजपा पर राजनीतिक वार करने की रणनीति अपना रही है।
पटना में कांग्रेस की यह बैठक केवल राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि इतिहास की पुनरावृत्ति भी है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 1912, 1922 और 1940 में यहां कई महत्वपूर्ण बैठकें हो चुकी हैं। सदाकत आश्रम से महात्मा गांधी, डॉ. राजेंद्र प्रसाद और जवाहरलाल नेहरू जैसी हस्तियों ने आजादी की लड़ाई की रणनीति तैयार की थी। आज उसी धरती से कांग्रेस ने फिर अपने राष्ट्रीय एजेंडे और भविष्य की दिशा का संकेत दिया है।






















