पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल (Patna Girls Hostel) में रहकर मेडिकल की पढ़ाई कर रही एक NEET छात्रा की संदिग्ध मौत ने बिहार की राजनीति, पुलिस व्यवस्था और सत्ता के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। यह मामला अब केवल एक छात्रा की असामयिक मौत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सवाल बन गया है कि क्या रसूख, सत्ता और प्रभाव के आगे कानून कमजोर पड़ रहा है। छात्रा की मौत को लेकर उठते सवालों के बीच पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के बयान ने इस प्रकरण को नई दिशा दे दी है। सांसद का कहना है कि इस केस में स्पीडी ट्रायल चलाकर सभी जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी होनी चाहिए, चाहे वे कितने ही रसूखदार क्यों न हों।

पप्पू यादव ने इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो से कराने की खुली मांग करते हुए संकेत दिए हैं कि इस घटना के पीछे “बड़ी मछलियों” का हाथ हो सकता है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर सीधे तौर पर यह सवाल उठाया कि संवैधानिक पद पर आसीन किसी नेता या मंत्री का पुत्र इस मामले में संलिप्त तो नहीं है। उनका आरोप है कि पीड़िता के परिजनों को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है और बिहार पुलिस किसी को बचाने के लिए अपनी सीमाओं का अतिक्रमण कर रही है।
यह मामला इसलिए भी गंभीर हो जाता है क्योंकि छात्रा मेडिकल प्रवेश परीक्षा जैसी प्रतिस्पर्धी परीक्षा की तैयारी कर रही थी और एक सुरक्षित माने जाने वाले गर्ल्स हॉस्टल में रह रही थी। ऐसे में हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक निगरानी और पुलिस की शुरुआती जांच पर सवाल उठना स्वाभाविक है। पप्पू यादव ने यह भी आरोप लगाया कि पटना में कथित सेक्स रैकेट से जुड़े माफियाओं को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है और इसी नेटवर्क के चलते सच्चाई सामने नहीं आने दी जा रही।






















