पटना के एक गर्ल्स हॉस्टल में नीट (Patna Girls Hostel NEET) की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध हालात में हुई मौत ने बिहार की कानून व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना के बाद न केवल राजधानी बल्कि पूरे राज्य में आक्रोश और चिंता का माहौल है। मामला अब सिर्फ एक छात्रा की मौत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह महिलाओं की सुरक्षा, प्रशासन की जवाबदेही और सत्ता के दावों की सच्चाई का प्रतीक बनता जा रहा है।
इस गंभीर प्रकरण को लेकर जहानाबाद से राजद सांसद डॉ. सुरेंद्र प्रसाद यादव पीड़िता के पैतृक गांव पतियावां पहुंचे। वहां उन्होंने शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर संवेदना जताई और भरोसा दिलाया कि इस लड़ाई में वे अकेले नहीं हैं। सांसद ने छात्रा को ‘बिहार की निर्भया’ बताते हुए कहा कि यह घटना पूरे समाज के लिए शर्मनाक है और अगर अब भी सख्त कदम नहीं उठाए गए तो हालात और भयावह हो सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजद और वे स्वयं इस मामले में हर स्तर पर संघर्ष करेंगे, चाहे वह सड़क हो या संसद।
परिजनों से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में सुरेंद्र यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बिहार में अब सरकार का इकबाल खत्म हो चुका है और कानून व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। सांसद के अनुसार, आज महिलाएं कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं, न घर में, न हॉस्टल में और न ही सार्वजनिक स्थानों पर। उन्होंने मुख्यमंत्री के उस दावे पर भी कटाक्ष किया जिसमें वे मौजूदा शासन को 2005 से पहले के दौर से बेहतर बताते हैं, और कहा कि हकीकत में स्थिति इसके उलट है।
राजद सांसद ने पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली को भी कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राज्य के पास पुलिस बल, तकनीक और संसाधनों की कोई कमी नहीं है, तो फिर अब तक मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं न कहीं प्रशासनिक उदासीनता या राजनीतिक दबाव के कारण मामले को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। उनका कहना था कि अगर सरकार सच में गंभीर होती तो अपराधियों को तुरंत जेल भेजकर पीड़ित परिवार को न्याय का भरोसा दिलाती।
जहानाबाद कांड पर सियासी बयानबाज़ी तेज.. NDA नेताओं ने SIT-CBI जांच के बीच इंसाफ का भरोसा दिलाया
सुरेंद्र यादव ने केंद्र और राज्य सरकार के बहुचर्चित नारे ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ को भी कठोर शब्दों में कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने इसे केवल एक खोखला और दिखावटी नारा बताते हुए कहा कि जब बेटियां हॉस्टल और शिक्षण संस्थानों में भी सुरक्षित नहीं हैं, तो ऐसे नारों का कोई अर्थ नहीं रह जाता। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे इस नारे का राजनीतिक इस्तेमाल बंद करें और जमीन पर ठोस कार्रवाई करें।
सांसद ने सरकार से मृतका के परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा देने और मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने की मांग की। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द न्याय नहीं मिला तो वे इस मुद्दे पर व्यापक आंदोलन छेड़ेंगे। सुरेंद्र यादव ने यहां तक कहा कि जरूरत पड़ी तो वे राजनीति से संन्यास लेने तक को तैयार हैं, लेकिन पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने से पीछे नहीं हटेंगे। पटना की इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बिहार में छात्राओं और महिलाओं की सुरक्षा सिर्फ भाषणों तक सीमित रह गई है या वास्तव में सरकार कोई ठोस कदम उठाएगी।






















