पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल (Patna Girls Hostel Case) में रह रही नीट की छात्रा की संदिग्ध मौत ने बिहार की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों को झकझोर कर रख दिया है। एक ओर जहां इस मामले को लेकर सियासी बयानबाजी तेज है, वहीं दूसरी ओर राज्य महिला आयोग ने इसे केवल एक घटना मानने के बजाय पूरे सिस्टम की खामियों से जोड़कर देखना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में मंगलवार 20 जनवरी 2026 को बिहार राज्य महिला आयोग ने पटना के जिलाधिकारी को पत्र भेजकर राजधानी में संचालित गर्ल्स हॉस्टलों से जुड़ी विस्तृत जानकारी तलब की है।
महिला आयोग की अध्यक्ष अप्सरा कुमारी ने मीडिया से बातचीत में साफ कहा कि आयोग इस बात की तह तक जाना चाहता है कि आखिर छात्राओं की सुरक्षा, रहन-सहन और बुनियादी सुविधाओं को लेकर व्यवस्था कितनी मजबूत है। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी को भेजे गए पत्र में सबसे पहले यह जानना चाहा गया है कि पटना में कुल कितने गर्ल्स हॉस्टल संचालित हो रहे हैं, उनमें से कितनों ने विधिवत रजिस्ट्रेशन कराया है और कितने हॉस्टल नियमों को ताक पर रखकर अवैध रूप से चल रहे हैं।
आयोग ने केवल कागजी रजिस्ट्रेशन तक ही खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि हॉस्टलों के भीतर की वास्तविक स्थिति पर भी सवाल खड़े किए हैं। पत्र में यह स्पष्ट रूप से पूछा गया है कि छात्राओं के रहने के लिए निर्धारित क्षेत्रफल क्या है और कितनी छात्राओं पर कितना आवासीय स्थान होना चाहिए। इसके साथ ही यह भी जानना चाहा गया है कि हॉस्टलों में पोषण की क्या व्यवस्था है, खाने-पीने की गुणवत्ता कैसी है और छात्राओं की सेहत का ध्यान किस तरह रखा जाता है।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी महिला आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। पत्र में यह जानकारी मांगी गई है कि एक निश्चित संख्या में छात्राओं पर कितने सुरक्षा गार्ड तैनात होने चाहिए और वर्तमान में किस हॉस्टल में कितनी सुरक्षा व्यवस्था मौजूद है। यह सवाल सीधे तौर पर उस चिंता से जुड़ा है कि क्या निजी हॉस्टल संचालक केवल मुनाफे पर ध्यान दे रहे हैं या फिर छात्राओं की सुरक्षा को भी उतनी ही प्राथमिकता दी जा रही है।
अप्सरा कुमारी ने कहा कि नीट छात्रा की मौत के बाद से आयोग पूरी तरह सतर्क है। जैसे ही यह मामला संज्ञान में आया, संबंधित अधिकारियों से बात की गई और अब एसआईटी का गठन भी हो चुका है। उन्होंने भरोसा जताया कि पुलिस जल्द ही अपनी जांच रिपोर्ट सौंपेगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। उनके मुताबिक यह मामला सिर्फ एक छात्रा की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बिहार में पढ़ाई के लिए बाहर से आने वाली हजारों छात्राओं की सुरक्षा से जुड़ा सवाल है।
महिला आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि वह केवल जांच और पत्राचार तक सीमित नहीं रहेगा। आयोग पूरे बिहार में महिला और छात्रा सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियान चला रहा है, जिसकी शुरुआत गया जी से की जा चुकी है। आने वाले समय में आयोग की टीमें अलग-अलग जिलों का दौरा करेंगी और जहां भी जरूरत होगी वहां सरकार से सीधी मदद ली जाएगी। आयोग का मानना है कि जब तक समाज, प्रशासन और सरकार मिलकर काम नहीं करेंगे, तब तक छात्राओं के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करना मुश्किल होगा।






















