पटना हाई कोर्ट ने पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में दायर आपराधिक रिट याचिका का निपटारा कर दिया है। कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने इस मामले की जांच पहले ही केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी है, इसलिए फिलहाल हाई कोर्ट के हस्तक्षेप या निगरानी की कोई आवश्यकता नहीं है।
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यह आदेश न्यायाधीश अरुण कुमार झा की एकलपीठ ने दिया। याचिकाकर्ता नवीन कुमार, जो मृत छात्रा के पिता हैं, ने कोर्ट से मांग की थी कि सीबीआई जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज या हाई कोर्ट के किसी वर्तमान जज के अधीन कराई जाए। हालांकि, कोर्ट ने इस मांग को ठुकरा दिया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह कोई जनहित याचिका (पीआईएल) नहीं है, जिसमें जांच की अदालती मॉनिटरिंग जरूरी हो। यदि याचिकाकर्ता को सीबीआई जांच में कोई कमी या असंतोष दिखता है, तो वे भविष्य में पुनः अदालत का रुख कर सकते हैं। बता दें कि जहानाबाद जिले की इस 18 वर्षीय नीट अभ्यर्थी की मौत 11 जनवरी को पटना के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान हुई थी। छात्रा को 6 जनवरी को बेहोशी की हालत में हॉस्टल से अस्पताल ले जाया गया था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच में उसके कपड़ों पर वीर्य के निशान मिले थे, जिससे दुष्कर्म की आशंका जताई गई है। मामले में शुरू में स्थानीय पुलिस की जांच हुई, लेकिन परिवार और जनता के विरोध के बाद बिहार सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश केंद्र सरकार से की, जो स्वीकृत हो गई।परिवार का कहना है कि वे सीबीआई जांच से भी पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं और न्यायिक निगरानी की मांग कर रहे हैं, लेकिन कोर्ट ने फिलहाल इस पर कोई आदेश नहीं दिया। यह मामला बिहार में कानून-व्यवस्था और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर बड़े विवाद का विषय बना हुआ है।






















