पटना उच्च न्यायालय (Patna High Court) की न्यायिक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। भारत सरकार ने पटना हाईकोर्ट के लिए दो नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी है, जिससे बिहार की न्याय व्यवस्था में लंबे समय से महसूस की जा रही जजों की कमी को कुछ हद तक दूर किया जा सकेगा। राष्ट्रपति द्वारा संविधान के अनुच्छेद 217(1) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए अधिवक्ता रितेश कुमार और अधिवक्ता प्रवीण कुमार को पटना उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। दोनों न्यायाधीश अपने-अपने पदभार ग्रहण करने की तिथि से न्यायिक दायित्व संभालेंगे।
यह अधिसूचना भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग के नियुक्ति प्रभाग द्वारा 5 जनवरी 2026 को जारी की गई। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि यह नियुक्ति राष्ट्रपति की स्वीकृति से की गई है और इसकी औपचारिक सूचना पटना उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल, बिहार के राज्यपाल, राज्य के मुख्यमंत्री, कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश सहित सभी संबंधित संवैधानिक और प्रशासनिक प्राधिकारों को भेज दी गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि नियुक्ति प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और जल्द ही दोनों नए न्यायाधीश न्यायिक कार्य शुरू करेंगे।
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न्यायिक नियुक्तियों की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो यह फैसला सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की अनुशंसाओं के अनुरूप लिया गया है। कॉलेजियम ने 20 फरवरी 2025 को अधिवक्ता रितेश कुमार के नाम की अनुशंसा की थी, जबकि अधिवक्ता प्रवीण कुमार के नाम को 1 जुलाई 2025 को स्वीकृति के लिए आगे बढ़ाया गया था। करीब एक वर्ष के भीतर इन सिफारिशों पर केंद्र सरकार की मुहर लगना इस बात का संकेत है कि न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच समन्वय के तहत नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है।
न्यायाधीश संगम कुमार साहू 7 जनवरी 2026 को पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे। शपथ ग्रहण समारोह राजभवन में आयोजित किया जाएगा, जहां राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान उन्हें शपथ दिलाएंगे। शपथ के साथ ही न्यायाधीश साहू पटना हाई कोर्ट के 47वें चीफ जस्टिस के रूप में कार्यभार संभालेंगे। न्यायाधीश साहू वर्तमान में ओडिशा उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में कार्यरत हैं।
पटना हाईकोर्ट में नए जजों की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है और न्यायिक सुधार को लेकर चर्चा तेज है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि दो नए न्यायाधीशों के आने से मामलों के निपटारे की गति बढ़ेगी और आम लोगों को समय पर न्याय मिलने की उम्मीद मजबूत होगी। साथ ही, यह कदम न्यायिक ढांचे को सुदृढ़ करने की केंद्र सरकार की मंशा को भी दर्शाता है। हालांकि, कॉलेजियम द्वारा 20 फरवरी 2025 को ही वरीय अधिवक्ता अंशुल के नाम की भी अनुशंसा की गई थी, लेकिन उस पर अभी तक अंतिम निर्णय लंबित है।




















