Patna Hostel Case: पटना के शंभू हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत अब केवल एक आपराधिक मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह बिहार की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है। एफएसएल रिपोर्ट सामने आने के बाद इस केस ने नया मोड़ ले लिया है और इसके साथ ही विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल ने नीतीश सरकार पर तीखा हमला बोल दिया है। राजद का आरोप है कि इस पूरे मामले में सत्ता पक्ष से जुड़े प्रभावशाली लोगों की भूमिका है और उन्हें बचाने के लिए पुलिस प्रशासन तथ्यों को दबाने की कोशिश कर रहा है।
राजद नेताओं का कहना है कि एफएसएल रिपोर्ट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब सरकार और पुलिस प्रशासन को देना चाहिए। पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक भाई वीरेंद्र यादव ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान खुलकर कहा कि इस मामले में एनडीए के बड़े नेताओं की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने दावा किया कि इसी वजह से जांच की दिशा बार-बार बदली जा रही है और सच्चाई को सामने आने से रोका जा रहा है। भाई वीरेंद्र ने मांग की कि पूरे मामले की तेज और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें कठोरतम सजा दी जाए।
इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में गर्मी और तेज हो गई है। राजद का आरोप है कि पुलिस प्रशासन सिर्फ निचले स्तर के अधिकारियों पर कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहा है। जहानाबाद से विधायक राहुल शर्मा ने भी पटना पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जांच पूरी तरह पटना एसएसपी की निगरानी में चल रही थी, ऐसे में केवल थानाध्यक्षों को निलंबित करना दिखावटी कार्रवाई है। राहुल शर्मा के अनुसार, अगर जांच में लापरवाही हुई है तो इसकी जवाबदेही शीर्ष स्तर के अधिकारियों की भी बनती है।
पटना पुलिस ने एफएसएल रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करते हुए कदमकुआं के अपर थानाध्यक्ष हेमंत झा और चित्रगुप्त नगर थाने की थानाध्यक्ष रोशनी कुमारी को निलंबित कर दिया है। पुलिस का कहना है कि सूचना संकलन और समय पर उचित कदम नहीं उठाने के कारण यह कार्रवाई की गई है। लेकिन राजद इसे अधूरी कार्रवाई बता रहा है और मांग कर रहा है कि पूरे सिस्टम की जांच होनी चाहिए, न कि केवल दो अधिकारियों को बलि का बकरा बनाया जाए।
इस केस को लेकर जनभावना भी लगातार बदल रही है। छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि एक मेडिकल की तैयारी कर रही छात्रा की मौत केवल व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि यह कोचिंग संस्कृति, हॉस्टल सुरक्षा और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर बड़ा सवाल है। वहीं, विपक्ष इसे कानून-व्यवस्था की विफलता के रूप में पेश कर रहा है और सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहा है।






















