पटना नगर निगम की 10वीं बैठक (Patna Nagar Nigam) ने शहर के विकास को लेकर कई अहम फैसलों पर मुहर लगा दी, लेकिन इसके साथ ही कई मुद्दों पर विवाद और असहमति भी सामने आई। करीब छह माह पहले तीन विवादित प्रस्तावों के कारण स्थगित हुई 9वीं बैठक के शेष प्रस्तावों को इस बार पारित कर दिया गया। मेयर सीता साहू की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में कुल नौ प्रस्तावों पर चर्चा हुई, जिनमें से आठ को विकास के दृष्टिकोण से मंजूरी मिल गई। हालांकि, म्यूनिसिपल बॉन्ड, टैक्स वृद्धि और विज्ञापन नीति जैसे विषयों पर तीखी बहस देखने को मिली, जो आने वाले समय में शहर की राजनीति और वित्तीय प्रबंधन को प्रभावित कर सकती है।
सबसे चर्चित प्रस्ताव 200 करोड़ रुपये का म्यूनिसिपल बॉन्ड जारी करने का रहा। निगम प्रशासन का दावा है कि इससे शहर के बुनियादी ढांचे और नागरिक सुविधाओं में सुधार होगा, जबकि केंद्र सरकार से भी 26 करोड़ रुपये का सहयोग मिलेगा। लेकिन इस कदम को लेकर कुछ पार्षदों ने गंभीर सवाल उठाए। पूर्व सशक्त स्थायी समिति सदस्य डॉ. आशीष कुमार सिन्हा ने बिना स्पष्ट परियोजना योजना के बॉन्ड जारी करने को जोखिम भरा बताया और कहा कि निवेशकों को ब्याज सहित राशि लौटानी होगी, जिससे निगम पर वित्तीय दबाव बढ़ सकता है। नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि राशि उन परियोजनाओं में लगाई जाएगी जिनसे निगम की आय बढ़ेगी, जैसे वेंडिंग जोन, मॉल और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स। उन्होंने पटना जंक्शन क्षेत्र को आधुनिक रूप देने की योजना बनाने का सुझाव भी दिया, ताकि शहर में आने वाले लोगों को बेहतर अनुभव मिल सके।
बैठक में स्वच्छता व्यवस्था सुधारने के लिए बड़े पैमाने पर संसाधन खरीदने का फैसला भी लिया गया। हर वार्ड से नियमित कचरा उठाव सुनिश्चित करने के लिए 150 ई-रिक्शा कचरा वाहन, 150 क्लोज टिपर, 75 ओपन टिपर, दो सुपर सकर मशीन और तीन मिनी पोकलेन खरीदे जाएंगे। इसके अलावा प्रत्येक वार्ड में 10 हाथ ठेले तैनात करने का निर्णय लिया गया, क्योंकि वर्तमान में निगम के पास पर्याप्त वाहन नहीं हैं और डीटीओ द्वारा 158 में से 152 वाहनों को जर्जर घोषित किया जा चुका है। पार्षदों के लिए एक-एक करोड़ रुपये की योजनाओं को भी मंजूरी दी गई और वन टाइम सेटलमेंट योजना के तहत एकमुश्त टैक्स भुगतान पर पेनाल्टी माफी के प्रचार पर जोर दिया गया।
नई विज्ञापन नियमावली पर चर्चा के दौरान पार्षदों ने प्रक्रिया पर सवाल उठाए और कहा कि प्रस्ताव को पारित करने से पहले उन्हें पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई। प्रशासन ने इस पर विशेष बैठक बुलाने का आश्वासन दिया। इसी तरह कमर्शियल प्रॉपर्टी टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव ने भी विवाद खड़ा किया। पूर्व डिप्टी मेयर विनय कुमार पप्पू ने इसे छोटे व्यापारियों और आम नागरिकों के लिए आर्थिक बोझ बताया, लेकिन बहुमत के समर्थन से टैक्स बढ़ोतरी का प्रस्ताव पास हो गया। इससे आने वाले समय में व्यापारिक गतिविधियों और स्थानीय बाजार पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
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शहर में पेयजल और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए हाई-यील्ड ट्यूबवेल और वाटर एटीएम जैसी परियोजनाओं को भी मंजूरी मिली। विभिन्न वार्डों में ट्यूबवेल निर्माण के लिए लगभग 1.33 से 1.36 करोड़ रुपये की लागत अनुमानित की गई है, जबकि हुडको के सीएसआर फंड से 100 वाटर एटीएम लगाने की योजना को भी हरी झंडी मिल गई। कांग्रेस मैदान, शेखपुरा, दरगाह शाह करबला परिसर, आर्य कुमार रोड, मछुआ टोली, महावीर कॉलोनी, श्रीकृष्ण नगर और विद्यापति मार्ग सहित कई इलाकों में इन योजनाओं का लाभ मिलेगा। इसके अलावा करबिगहिया में हर घर नल जल योजना, वार्ड 29 में धोबी घाट का रिनोवेशन और वार्ड 59 में पाइपलाइन विस्तार जैसे कार्यों को भी मंजूरी दी गई।
नवविस्तारित क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं के सर्वे को लेकर भी विवाद सामने आया। पार्षदों ने सवाल उठाया कि सर्वे केवल 19 वार्डों में ही क्यों किया गया, जबकि इसे सभी वार्डों में होना चाहिए था। बजट की पुष्टि नौ महीने बाद किए जाने पर भी वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठे। पार्षद डॉ. इंद्रदीप चंद्रवंशी ने प्रक्रिया में देरी पर चिंता जताई, वहीं अन्य पार्षदों ने पुराने पाइपलाइन बदलने और बायपास क्षेत्र में सुविधाएं सुधारने की मांग रखी।



















