पटना में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की मौत का मामला अब सिर्फ एक चिकित्सकीय जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह डॉक्टरों की सुरक्षा, अस्पतालों की जवाबदेही और सिस्टम पर बढ़ते दबाव की बड़ी बहस में बदलता नजर आ रहा है। पटना में NEET छात्रा की मौत मामले में रविवार को SIT एक्शन में दिख रही है। रविवार को SIT की टीम प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल पहुंची। टीम यहां 2 घंटे तक रही और डॉक्टर्स से पूछताछ हो रही है। जानकारी के मुताबिक कुछ डॉक्यूमेंट भी सीज किए गए हैं।
इस संवेदनशील प्रकरण में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने हीरामती प्रभात मेमोरियल अस्पताल और उसके संचालक डॉक्टर सतीश कुमार सिंह की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। IMA ने बिहार के पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर स्पष्ट कहा है कि हालात को देखते हुए अस्पताल परिसर और संबंधित डॉक्टरों की सुरक्षा तत्काल सुनिश्चित की जानी चाहिए।

जानकारी के मुताबिक, शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर NEET की तैयारी कर रही छात्रा की तबीयत बिगड़ने पर उसे सबसे पहले हीरामती प्रभात मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां करीब तीन दिनों तक उसका इलाज चला, लेकिन हालत में अपेक्षित सुधार नहीं होने पर डॉक्टरों ने उसे उच्च स्तरीय उपचार के लिए मेदांता अस्पताल रेफर किया। मेदांता में इलाज के दौरान छात्रा की मौत हो गई, जिसके बाद पूरे मामले ने गंभीर और संवेदनशील रूप ले लिया।
छात्रा की मौत की खबर सामने आते ही परिजनों के साथ-साथ स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। आरोप-प्रत्यारोप के बीच कुछ संगठनों और प्रदर्शनकारियों ने हीरामती प्रभात मेमोरियल अस्पताल के खिलाफ नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों की भूमिका पर सवाल उठने लगे, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया और कानून-व्यवस्था को लेकर भी चिंता बढ़ने लगी।
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IMA ने इस पूरे घटनाक्रम को केवल एक अस्पताल या एक डॉक्टर से जोड़कर देखने के बजाय इसे व्यापक संदर्भ में चिकित्सकों की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बताया है। संगठन का कहना है कि अगर इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कानून के तहत होनी चाहिए, लेकिन जांच से पहले या जांच के नाम पर डॉक्टरों और अस्पतालों के खिलाफ हिंसा, दबाव या डर का माहौल बनना न केवल गलत है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। इसी वजह से IMA ने पुलिस प्रशासन से सुरक्षा की मांग करते हुए यह भी कहा है कि डॉक्टर भयमुक्त माहौल में अपनी बात रख सकें।
इसी बीच हीरामती प्रभात मेमोरियल अस्पताल के सीएमडी डॉक्टर सतीश कुमार सिंह ने भी इस मामले में अपना पक्ष सामने रखने की तैयारी कर ली है। उन्होंने प्रेस वार्ता बुलाने की घोषणा की है, जिसमें इलाज की पूरी प्रक्रिया, रेफरल का निर्णय और लगाए जा रहे आरोपों पर जवाब दिए जाने की संभावना है।






















