मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar Order) द्वारा अधिकारियों को सप्ताह में दो दिन जनता की शिकायतें सुनने का निर्देश दिया गया है। यह निर्णय शासन और जनता के बीच संवाद को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस फैसले पर राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी का हृदय से आभार। उन्होंने माना कि इस तरह की पहल से उनके अभियान को नई गति मिलेगी और विभागीय कार्यप्रणाली में सुधार की उम्मीद बढ़ेगी।
विजय सिन्हा ने कहा कि इस कार्यक्रम के लागू होने से हर विभाग में समस्याओं के समाधान के लिए एक स्पष्ट प्रक्रिया तैयार होगी। उन्होंने कहा कि यह पहल नागरिकों के विश्वास को मजबूत करेगी और जनता में यह संदेश जाएगा कि सरकार सीधे उनकी बात सुनने को तैयार है। बिहार में लंबे समय से फरियाद सुनवाई व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं, ऐसे में यह आदेश प्रशासनिक पारदर्शिता और जनसंपर्क बढ़ाने का माध्यम बन सकता है।
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उपमुख्यमंत्री से जब यह पूछा गया कि क्या वह तेज प्रताप यादव द्वारा आयोजित दही-चूड़ा भोज में शामिल होंगे, तो उन्होंने सांस्कृतिक अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि सनातन संस्कृति और संस्कार के भाव से जब भी किसी ने आमंत्रित किया है, उन्होंने उसका सम्मान किया है। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि सनातन संस्कृति के कार्यक्रमों में और मां भारती के भाव को लेकर लोग जुड़े ताकि समाज में गौरव और सकारात्मकता बढ़े। उनके इस बयान को राजनीतिक खेमों के बीच एक सांस्कृतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है, क्योंकि बिहार की राजनीति में दही-चूड़ा भोज को नई सामाजिक और राजनीतिक कड़ी के रूप में माना जाता है।
विजय सिन्हा ने विभागीय बैठकों की प्रक्रिया पर भी रोशनी डालते हुए कहा कि बैठक सिर्फ जिला स्तर तक सीमित नहीं रहेगी। जहां किसी अंचल में अधिक शिकायतें मिलेंगी, वहां वे स्वयं और उनके पदाधिकारी जाकर समीक्षा करेंगे। यह बयान साफ संकेत देता है कि सरकार और प्रशासन अब जन शिकायतों को फाइलों में बंद रखने के बजाय वास्तविक स्थल पर जाकर समाधान की नीति पर काम करेगा।






















