पटना के शंभू हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत (Patna Shambhu Hostel Case) अब एक साधारण मामला नहीं रह गई है, बल्कि यह बिहार की कानून-व्यवस्था, पुलिस कार्यशैली और जांच प्रणाली पर बड़ा सवाल बन चुकी है। इस हाई-प्रोफाइल केस में अब फॉरेंसिक साइंस लैब यानी FSL की एंट्री के बाद जांच ने नया और निर्णायक मोड़ ले लिया है। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले तीन से चार दिनों में इस मामले से जुड़ा कोई बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा सामने आ सकता है।
6 जनवरी को शंभू हॉस्टल में छात्रा अपने कमरे में बेहोशी की हालत में मिली थी। हॉस्टल स्टाफ ने बिना किसी कानूनी प्रक्रिया का इंतजार किए उसे अस्पताल पहुंचाने का फैसला किया। एक नहीं बल्कि तीन अलग-अलग अस्पतालों में उसका इलाज कराया गया, लेकिन 9 जनवरी को आखिरकार उसकी मौत हो गई। इन तीन दिनों के दौरान जो कुछ हुआ, उसने जांच एजेंसियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
बक्सर नगर थाना से कैदी फरार.. पीड़ित परिवार ने कराई गिरफ्तारी, पुलिस प्रशासन कटघरे में
कानून के जानकार साफ तौर पर कहते हैं कि किसी भी संदिग्ध मौत के मामले में शुरुआती 24 से 48 घंटे सबसे अहम होते हैं। यही वह समय होता है जब घटनास्थल को सील कर साक्ष्य जुटाए जाते हैं। लेकिन शंभू हॉस्टल केस में न तो छात्रा के कमरे को सील किया गया और न ही बेडशीट, कपड़े या अन्य जरूरी साक्ष्य जब्त किए गए। पुलिस की यह ढिलाई अब जांच के घेरे में है।
थाना प्रभारी रौशनी कुमारी द्वारा शुरुआती जांच में आत्महत्या की थ्योरी सामने रखी गई, जिसे एएसपी से लेकर एसएसपी स्तर तक दोहराया गया। इस कथित निष्कर्ष ने मामले को कुछ दिनों तक दबाए रखा। लेकिन जैसे ही परिजन सामने आए और उन्होंने पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाए, मामला पटना की सड़कों तक पहुंच गया।
न्याय की मांग को लेकर परिजनों और समर्थकों ने कारगिल चौक पर जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में लोग छात्रा के समर्थन में उतरे, लेकिन पुलिस ने संवेदनशीलता दिखाने के बजाय 100 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों पर एफआईआर दर्ज कर दी। इस कार्रवाई ने पुलिस की मंशा और भूमिका को लेकर विवाद को और गहरा कर दिया।
चार दिन बाद आई पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने पूरी कहानी ही पलट दी। रिपोर्ट में छात्रा के साथ यौन शोषण की पुष्टि हुई, जिससे आत्महत्या वाली थ्योरी कमजोर पड़ गई। इसके बाद पुलिस को भी अपने रुख में बदलाव करना पड़ा और आधिकारिक तौर पर यह स्वीकार करना पड़ा कि यौन शोषण की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
मामले की गंभीरता और बढ़ते जनदबाव को देखते हुए विशेष जांच टीम यानी SIT का गठन किया गया। SIT ने जांच को नई दिशा देते हुए प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल पहुंचकर इलाज से जुड़े अहम साक्ष्य जुटाए। इसके बाद फॉरेंसिक जांच को मजबूती देने के लिए FSL की टीम को मैदान में उतारा गया।
सोमवार को FSL की पूरी टीम शंभू हॉस्टल पहुंची और छात्रा के कमरे की बारीकी से जांच की। कमरे के हर कोने, हर वस्तु और हर संभावित साक्ष्य को वैज्ञानिक तरीके से खंगाला गया। इन साक्ष्यों को अब लैब में जांच के लिए भेजा गया है, जहां DNA और अन्य फॉरेंसिक परीक्षण किए जा रहे हैं।
ADG CID पारसनाथ ने स्पष्ट किया कि DNA जांच एक जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया है। इसी कारण रविवार को भी FSL कार्यालय खुला रखा गया ताकि जांच में कोई देरी न हो। उन्होंने भरोसा जताया कि अगले दो से तीन दिनों में जांच पूरी कर रिपोर्ट मुख्यालय को सौंप दी जाएगी।






















