Patna Shambhu Hostel Case: पटना के शंभू हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत को लेकर पुलिस जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। SSP द्वारा सार्वजनिक की गई CCTV टाइमलाइन ने घटना से जुड़े कई भ्रम दूर कर दिए हैं और यह साफ किया है कि छात्रा हॉस्टल पहुंचने के बाद लगातार अपने कमरे में ही मौजूद थी। पुलिस का दावा है कि अब तक की जांच में किसी बाहरी व्यक्ति की एंट्री या जबरन घुसपैठ का कोई सबूत नहीं मिला है, जिससे यह मामला आत्महत्या या आंतरिक परिस्थितियों से जुड़ा होने की दिशा में बढ़ता दिख रहा है।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक पीड़िता 5 जनवरी को दोपहर करीब 3:05 बजे पटना जंक्शन पहुंची थी। रेलवे स्टेशन के CCTV फुटेज में उसे ट्रेन से उतरते हुए स्पष्ट रूप से देखा गया है। इसके बाद वह ऑटो रिक्शा में सवार होकर शंभू हॉस्टल की ओर जाती है। संयोग से उसी ऑटो में हॉस्टल की एक अन्य छात्रा भी मौजूद थी, जिसका बयान पुलिस ने दर्ज कर लिया है। ऑटो चालक का बयान भी इस बात की पुष्टि करता है कि दोनों छात्राएं सीधे हॉस्टल पहुंचीं और रास्ते में किसी तरह की असामान्य गतिविधि नहीं हुई।
करीब 3:30 बजे छात्रा हॉस्टल में दाखिल होती है। गेट पर लगे CCTV कैमरे में उसकी एंट्री दर्ज है। पुलिस के अनुसार इसके बाद वह सिर्फ दो बार कुछ मिनटों के लिए कमरे से बाहर निकली, वह भी बाथरूम जाने के लिए। इसके अलावा न तो उसे किसी अन्य छात्रा से मिलते हुए देखा गया और न ही किसी संदिग्ध व्यक्ति की आवाजाही कैमरे में कैद हुई। यह तथ्य पुलिस की जांच के लिए बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे यह स्पष्ट होता है कि छात्रा अपने कमरे में अकेली थी और किसी बाहरी हस्तक्षेप के संकेत नहीं मिले।
घटना स्थल का भौतिक निरीक्षण भी इसी दिशा में इशारा करता है। पीड़िता का कमरा हॉस्टल के तीसरे फ्लोर पर स्थित था, जहां केवल एक दरवाजा और एक छोटी खिड़की है जिस पर लोहे की जाली लगी हुई है। कमरे तक पहुंचने वाला कॉरिडोर CCTV से पूरी तरह कवर था। SSP ने बताया कि किसी भी कैमरे में जबरन दरवाजा खोलने या किसी व्यक्ति के भीतर जाने का फुटेज नहीं मिला है।
6 तारीख की सुबह करीब 9 बजे वार्डन ने छात्रा को नाश्ते के लिए जगाने की कोशिश की, लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। दोपहर 3:50 बजे जब वह लंच के लिए भी बाहर नहीं आई तो वार्डन को शक हुआ। अन्य छात्राओं को बुलाया गया और नाम लेकर आवाज दी गई, फिर भी कोई जवाब नहीं मिला। अंत में पास के गार्ड की मदद से दरवाजा तोड़ा गया, जहां छात्रा मृत अवस्था में मिली।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि छात्रा 27 तारीख से 5 तारीख तक जहानाबाद में अपने परिवार के साथ थी और 5 तारीख को दोपहर 12:38 बजे तक उसकी लोकेशन वहीं दर्ज हुई। इसके बाद वह सीधे पटना पहुंची। परिवार के बयान और वैज्ञानिक अनुसंधान के आधार पर पुलिस अब यह समझने की कोशिश कर रही है कि आखिरी कुछ घंटों में ऐसा क्या हुआ जिसने इस दुखद घटना को जन्म दिया।
इस पूरे मामले में CCTV फुटेज पुलिस के लिए सबसे मजबूत कड़ी बनकर उभरा है। जांच अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल साक्ष्य और चश्मदीद बयानों के आधार पर किसी आपराधिक साजिश की पुष्टि अब तक नहीं हुई है, हालांकि हर एंगल से जांच जारी है। पुलिस मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई का दबाव और निजी परिस्थितियों जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखकर केस को आगे बढ़ा रही है।
शंभू हॉस्टल केस ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के मानसिक दबाव और हॉस्टल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना केवल एक आपराधिक जांच का विषय नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और छात्र कल्याण नीति पर गंभीर मंथन की जरूरत को भी दर्शाती है।






















