बिहार के सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान सदन में पटना का नाम बदलकर पाटलिपुत्र करने की जोरदार मांग उठाई।उन्होंने कहा कि पाटलिपुत्र नाम मौर्य साम्राज्य के गौरवशाली इतिहास और भारत की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। जब हम “पाटलिपुत्र” कहते हैं तो सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। उन्होंने अन्य शहरों के उदाहरण दिए—जैसे कलकत्ता को कोलकाता, बंबई को मुंबई और उड़ीसा को ओडिशा—तो पटना को भी इसका प्राचीन नाम क्यों नहीं लौटाया जाए?
उपेंद्र कुशवाहा ने आगे कहा कि जब हम अपने पूर्वजों के योगदान को याद करते हैं, तो नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है. यही प्रेरणा विकसित भारत की यात्रा को आगे बढ़ाती है. राष्ट्रपति के शब्द हमें उस दौर की याद दिलाते हैं, जब भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था.
भारत में किसी शहर का नाम बदलने के लिए पहले राज्य सरकार को विधानसभा में प्रस्ताव पास करना होता है. इसके बाद केंद्र सरकार की मंजूरी जरूरी होती है. इस प्रक्रिया में केंद्रीय गृह मंत्रालय की अनापत्ति जरूरी होती है. साथ ही रेल मंत्रालय, डाक विभाग, इंटेलिजेंस ब्यूरो और सर्वे ऑफ इंडिया से भी सहमति ली जाती है.






















