नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सप्ताह बैंकॉक में आयोजित बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में म्यांमार के जुंटा प्रमुख जनरल मिन से मिलने की तैयारी में हैं। म्यांमार में हालिया भूकंप और वहां जारी अस्थिरता के बीच यह मुलाकात बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भूकंप के बाद भारत ने त्वरित सहायता पहुंचाकर म्यांमार का साथ दिया था, और अब इस मुलाकात से दोनों देशों के संबंधों में नई मजबूती आने की उम्मीद है।
म्यांमार में संकट का दौर
म्यांमार इन दिनों गहरे संकट से गुजर रहा है। हाल ही में आए भूकंप ने भारी तबाही मचाई, जिससे कई लोग बेघर हो गए और गांव-गांव बर्बाद हो गए। इसके साथ ही, सैन्य शासन और विद्रोही समूहों के बीच चल रही हिंसा ने हालात को और जटिल बना दिया है। इस चुनौतीपूर्ण समय में म्यांमार सरकार ने कहा, “हमें उम्मीद है कि हमारे सैन्य प्रमुख और पीएम मोदी की जल्द मुलाकात होगी।” यह बयान शनिवार को पीएम मोदी और जनरल मिन के बीच फोन पर हुई बातचीत के बाद सामने आया।
पीएम मोदी ने दिया मदद का आश्वासन
शनिवार को हुई बातचीत में पीएम मोदी ने जनरल मिन को भूकंप से हुए नुकसान के लिए हरसंभव सहायता का वादा किया। भारत ने सबसे पहले राहत सामग्री भेजी, जिसमें भोजन, टेंट और दवाएं शामिल थीं। रूस, चीन, थाईलैंड, सिंगापुर और मलेशिया जैसे देशों ने भी मदद की, लेकिन भारत की तत्परता की सभी ने सराहना की।
‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ से पहुंचाई राहत
भारत ने ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ के जरिए म्यांमार को बड़ी सहायता दी। इस अभियान में राहत और बचाव दलों के साथ राशन, स्लीपिंग बैग, दवाइयां, उपकरण, खोजी कुत्ते और एक फील्ड अस्पताल भेजा गया। भूकंप और सैन्य संघर्ष से जूझ रहे म्यांमार के लोगों को इससे काफी राहत मिली। खासकर तब, जब विद्रोहियों और सैन्य सरकार के बीच तनाव ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। भारत की इस मदद ने पड़ोसी देश में भरोसा पैदा किया है।
बिम्सटेक में बढ़ेगा सहयोग
पीएम मोदी और जनरल मिन की मुलाकात से न सिर्फ भारत-म्यांमार के रिश्ते मजबूत होंगे, बल्कि बिम्सटेक के मंच पर क्षेत्रीय सहयोग को भी बढ़ावा मिलेगा। यह बैठक दोनों देशों के बीच आपसी समझ को गहरा करने और संकट के समय एक-दूसरे के साथ खड़े होने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करेगी।