बिहार के शिवहर जिले के सुंदरपुर निवासी एवं बज्जिका भाषा के कवि लक्ष्मी नारायण पांडेय “प्रेमी” ने इस श्रीमद्भगवतगीता महाकाव्य का बज्जिका भाषा में गायन शैली में अनुवाद किया है। 84 वर्षीय लक्ष्मीनारायण पांडेय “प्रेमी” ने आठ महीने की मेहनत के बाद अनुवाद कर इसका प्रकाशन कराया है। यही वजह है कि शिवहर सीतामढ़ी और मुजफ्फरपुर समेत पूरे देशस्तर पर उनकी चर्चा हो रही है। इसके पूर्व उन्होंने बज्जिका भाषा में साइकिल की आत्मकथा और बहुरुपिया नामक जैसे कितनी ग्रंथ लिखी हैं। साथ ही इन्होंने बज्जिका और हिंदी में सैकड़ों रचनाएँ ग़ज़ल और कहानियाँ लिखी है। इन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। बज्जिका भाषा की यह श्रीमदभागवत कथा आनलाइन स्टोर्स फ्लिपकार्ट और अमेज़न पर उपलब्ध है। शीघ्र ही यह किताब दुकानों पर भी उपलब्ध होगी।
पिता के सपने को बेटे ने किया साकार
कवि लक्ष्मी नारायण पांडेय “प्रेमी” का सपना था कि उनके पुस्तक का प्रकाशन हो सके। उनके इस सपने को उनके बेटे भुवन भास्कर ने पूरा किया है। आठ महीने की मेहनत के बाद भुवन भास्कर ने पुस्तक का प्रकाशन करवाया। इस बात की खबर जब कवि लक्ष्मी नारायण पांडेय “प्रेमी” को हुई तो वो काफी भावुक भी हुए। उन्होंने फेसबुक पर शेयर किए अपने एक पोस्ट में इसका जिक्र भी किया है।
कवि लक्ष्मी नारायण पांडेय “प्रेमी” ने बताया कि “सच तो यह है कि इसके प्रकाशन का सम्पूर्ण श्रेय मेरे तृतीय सुपुत्र भुवन को जाता है जिसनें अपना बहुमूल्य समय देकर आर्थिक और मानसिक सहयोग के रूप में दृढ़-संकल्प और अटल विश्वास के साथ इसका प्रकाशन कराकर पितृभक्त के रूप में अपनी भूमिका निभाया है। मैं हृदय से उसे आशीर्वाद देता हूं कि उसका भविष्य सदा ही उज्वल बना रहे और उसका जीवनरूपी वाटिका सदा ही हरा-भरा और फलता-फूलता रहे।”





















