वक्फ संशोधन बिल को लेकर देश की सियासत गरमाई हुई है। बुधवार को लोकसभा और गुरुवार को राज्यसभा में पेश किए जाने वाले इस बिल पर सत्ता पक्ष और विपक्ष में टकराव तय माना जा रहा है। संसद की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में यह तय किया गया कि प्रश्नकाल के बाद दोपहर 12 बजे बिल को सदन में लाया जाएगा। इस पर जेपीसी द्वारा सुझाए गए 20 संशोधनों पर आठ घंटे की चर्चा होगी, जिसके बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू जवाब देंगे।
बिहार में चुनावी समीकरणों पर असर
वक्फ संशोधन बिल पर बिहार की सियासत में भी हलचल है, क्योंकि राज्य में इसी साल नवंबर में विधानसभा चुनाव होने हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस बिल को पारित कराने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है, वहीं बिहार एनडीए ने भी इसे लेकर अपनी रणनीति साफ कर दी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के बाद केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और जीतनराम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) ने भी बिल के समर्थन में केंद्र सरकार का साथ देने का ऐलान कर दिया है।
हालांकि, JDU को इस फैसले से चुनाव में मुस्लिम वोट बैंक के नाराज होने का डर सता रहा है। पार्टी इस मुद्दे पर सतर्कता बरत रही है, क्योंकि बिहार में मुस्लिम मतदाताओं की अहम भूमिका है। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) इस बिल के विरोध में खुलकर सामने आ गया है। पार्टी का कहना है कि वह संसद में बिल के खिलाफ पुरजोर तरीके से विरोध दर्ज कराएगी।
चिराग और मांझी ने दिया BJP को पूरा समर्थन
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने अपने सांसदों को अगले दो दिनों तक सदन में मौजूद रहने का व्हिप जारी किया है, ताकि इस बिल पर NDA की एकजुटता दिखाई जा सके। दूसरी ओर, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) के प्रमुख जीतनराम मांझी ने कहा कि यह बिल भी धारा 370 और तीन तलाक की तरह है, जिस पर पहले तो सवाल उठे थे, लेकिन बाद में लोग इसके फायदे समझने लगे। उन्होंने कहा कि “पहले तीन तलाक को मुस्लिम विरोधी कहा गया था, लेकिन आज मुस्लिम महिलाएं सशक्त हुई हैं। वक्फ बिल भी समाज के हित में है।”