राज्य सरकार द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को उनके सरकारी आवास (Rabri Devi Government House) खाली करने का निर्देश दिया गया। इस फैसले ने सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव की नई लकीर खींच दी है। राजद नेताओं ने इस निर्णय को राजनीति से प्रेरित बताते हुए सवाल उठाए हैं कि आखिर अचानक मानदंडों में बदलाव की क्या मजबूरी आ पड़ी। राजद नेता शक्ति सिंह यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मुद्दा आवास से मोह का नहीं, बल्कि तर्क और पारदर्शिता की कमी का है। उन्होंने यह आरोप लगाया कि जिनके पास संबंधित विभाग है, वे भी चुप हैं, और भाजपा की दखल के बाद निर्णय लेने की प्रक्रिया मनमानी बन गई है। शक्ति सिंह यादव ने कहा कि हमें आवास परिवर्तन से आपत्ति नहीं, परंतु यह स्पष्ट होना चाहिए कि इसके पीछे मंशा क्या है।
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इसी मुद्दे पर राजद के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय न केवल परंपरा के खिलाफ है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी संवेदनशील है, क्योंकि दो पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी इस आवास में रहते हैं। उन्होंने सवाल किया कि अचानक पूर्व मुख्यमंत्री और नेता विपक्ष को आवास खाली करने का आदेश क्यों दिया गया। उनका कहना है कि बिहार की जनता इस निर्णय का औचित्य जानना चाहती है, और ऐसी परंपरा नहीं बननी चाहिए जिसका पालन आगे न किया जा सके। उन्होंने लालू प्रसाद यादव को देश का सर्वमान्य नेता बताते हुए कहा कि उनकी सुरक्षा से जुड़े किसी भी मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
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पूर्व सांसद मंगनीलाल मंडल ने सरकार पर और गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार 2005 से मुख्यमंत्री हैं, और यदि ऐसा बदलाव आवश्यक था तो 19 वर्षों में पहले क्यों नहीं उठाया गया। उनके अनुसार यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेतृत्व का विश्वास जीतने के लिए उठाया गया है क्योंकि गृह विभाग और पुलिस विभाग सीएम से लेकर भाजपा के पास चला गया है। मंडल का आरोप है कि खुद को मजबूत साबित करने के लिए मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार को अपमानित करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि आवास स्थानांतरण ही करना था तो हार्डिंग रोड वाले आवास को ही नामित किया जा सकता था, परंतु विरोधियों को परेशान करने की मंशा से अचानक यह मामला बनाया गया।






















