लैंड फॉर जॉब्स मामले में राबड़ी देवी, मीसा भारती और हेमा यादव को जमानत मिल गई है। राऊज एवेन्यू कोर्ट ने लैंड फॉर जॉब मामले में अगली सुनवाई तक अंतरिम जमानत दे दी है। साथ ही तीनों को 1 लाख का बेल बॉन्ड भरने को कहा गया है मामले की अगली सुनवाई 28 फरवरी को होगी।
29 जनवरी को लालू यादव की ईडी के सामने हुई थी पेशी
लैंड फॉर जॉब केस में आज यानी शुक्रवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और उनकी बेटियों मीसा भारती, हेमा यादव समेत अन्य आरोपियों की पेशी हुई थी। जिसमें कोर्ट ने लालू परिवार को राहत दी है।इससे पहले लैंड फॉर जॉब मामले में ED ने 29 जनवरी को लालू प्रसाद यादव से 10 घंटे तक पूछताछ की थी वहीं, 30 जनवरी को पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव से लगभग 8 घंटे तक सवाल-जवाब किए थे।
सरकार में रहते हुए तेजस्वी ईडी के सामने नहीं हुए थे पेश
इससे पहले डिप्टी सीएम रहते हुए तेजस्वी यादव और राजद सुप्रीमो लालू यादव ने ED के दो बार भेजे गए समन को इग्नोर किया था लेकिन, महागठबंधन की सरकार गिरते ही तीसरे समन में उन्हें ईडी के सामने पेश होना पड़ा। ED ने इस मामले में तेजस्वी यादव के करीबी अमित कात्याल और लालू के ओएसडी रहे भोला यादव को गिरफ्तार कर चुकी है। भोला यादव फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। इनके साथ ही लालू यादव, तेजस्वी, राबड़ी मीसा सभी जमानत पर हैं।
क्या है लैंड फॉर जॉब्स स्कैम?
यूपीए-1 की सरकार (2004 से 2009) में लालू प्रसाद रेल मंत्री थे। तब लालू ने 7 लोगों को रेलवे के ग्रुप-डी में नौकरी दी थी। नौकरी के बदले उनसे औने-पौने दाम में जमीनें लिखवाई थीं। सीबीआई द्वारा दायर चार्जशीट के मुताबिक लालू और उनके परिवार वालों पर रेलवे में नौकरी दिलाने के बदले अवैध तरीके से जमीन अपने नाम कराने का आरोप है।
4 करोड़ रुपए की जमीन 26 लाख में लिखवा ली
सीबीआई के अनुसार लालू के परिवार ने रेलवे के सात अभ्यर्थियों से पटना और बिहटा की 1 लाख स्क्वायर फीट से ज्यादा जमीन महज 26 लाख रुपए में लिखवा ली। उस समय की सर्किल रेट के अनुसार जमीन की कीमत 4.39 करोड़ रुपए थी। अहम बात है कि लैंड ट्रांसफर के ज्यादातर केस में जमीन मालिक को नगद भुगतान किया गया। यह पूरा खेला गिफ्ट और सेल डीड के जरिए हुआ था।




















