लोकसभा के भीतर मंगलवार का दिन राजनीतिक तपिश से भरा रहा। नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi Questions) द्वारा चुनाव आयोग, वोटर लिस्ट और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका पर उठाए गए सवालों ने सत्ता और विपक्ष के बीच नया तूफान खड़ा कर दिया है। राहुल गांधी के बयान के बाद शुरू हुई राजनीतिक बहस थमने का नाम नहीं ले रही, और अब विपक्षी दलों के वरिष्ठ सांसद लगातार सरकार से जवाब मांग रहे हैं।
राजद सांसद मनोज झा ने राहुल गांधी के सवालों को पूरी तरह जायज़ ठहराते हुए कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना बेईमानी नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा है। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष का कोई भी प्रश्न सिर्फ इसलिए खारिज कर दिया जाए क्योंकि उसे राहुल गांधी पूछ रहे हैं, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों का अपमान है। मनोज झा ने दावा किया कि जब चुनाव आयोग को जवाब देना चाहिए होता है और सरकार या उसके प्रवक्ताओं को सामने आना पड़ता है, तब असलियत समझ में आती है। उनका इशारा साफ था कि संस्थाओं पर राजनीतिक दबाव बढ़ता जा रहा है और जवाबदेही कम होती जा रही है।
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कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास उस सवाल का कोई जवाब नहीं है, जिसे राहुल गांधी ने उठाया है। गोगोई ने कहा कि सरकार ने ऐसा कानून क्यों बदला, जिसके तहत CCTV तस्वीरें सार्वजनिक की जाती थीं, और मशीन-रीडेबल वोटर लिस्ट आम लोगों को क्यों उपलब्ध नहीं कराई जा रही—ये मुद्दे तकनीकी नहीं, बल्कि लोकतंत्र की पारदर्शिता के प्रतीक हैं। गोगोई ने यह भी कहा कि जब भाजपा जवाब नहीं दे पाती तो वह विपक्षी नेताओं की छवि खराब करने की कोशिश करती है, लेकिन कांग्रेस संविधान और आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाती रहेगी।
कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने सरकार पर और भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा को लगता है कि संविधान में छेड़छाड़ और वोटिंग अधिकारों से खिलवाड़ ‘ड्रामा’ है, तो यह लोकतंत्र पर गहरी चोट है। पुनिया ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार चुनाव आयोग से मिलीभगत के बिना सत्ता में नहीं लौट सकती, और इसी कारण न तो कोई जांच होगी और न ही कोई कार्रवाई। उन्होंने दावा किया कि जो बातें सदन में उठाई जा रही हैं, वे लोकतंत्र की नींव से जुड़ी हैं लेकिन सरकार हर संवैधानिक सवाल से बच रही है।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने SIR (State-wide Integrated Roll) प्रणाली को लेकर बड़ा आरोप लगाया। उनका कहना था कि बिहार में इस प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में लोगों का वोट काटा गया और इसमें सबसे अधिक नुकसान दलित और मुस्लिम समुदाय को हुआ। मसूद का बयान वोटर लिस्ट की पारदर्शिता पर व्यापक बहस को जन्म दे रहा है, क्योंकि यदि वोटर डेटा में गड़बड़ी का आरोप सही निकलता है तो यह चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़ा कर सकता है।






















