नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi in Rae Bareli) ने मंगलवार को अपने संसदीय गढ़ रायबरेली से मोदी सरकार पर तीखा और वैचारिक हमला बोलते हुए राजनीति, अर्थव्यवस्था और संविधान की दिशा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि आज का हिंदुस्तान आजादी से पहले वाले दौर की तरह असमानता और शोषण की ओर धकेला जा रहा है, जहां कुछ गिने-चुने पूंजीपति मजबूत हो रहे हैं और आम जनता के अधिकार लगातार छीने जा रहे हैं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि आरएसएस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बाबा साहेब अंबेडकर, महात्मा गांधी और भारतीय संविधान की मूल सोच को मिटाने का प्रयास कर रहे हैं।

राहुल गांधी ने कहा कि किसानों की जमीनें छीनी जा रही हैं, सरकारी योजनाओं को कमजोर किया जा रहा है और उनके लिए तय बजट को बड़े उद्योगपतियों अदाणी और अंबानी के हवाले किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि आज सरकार किसानों और मजदूरों की नहीं, बल्कि पूंजीपतियों की सरकार बन चुकी है। उनके अनुसार, इस तरह की नीतियों से देश को कोई दीर्घकालिक लाभ नहीं मिलने वाला, बल्कि भुखमरी और बेरोजगारी का खतरा और गहराता जाएगा।
मीडिया से बातचीत में राहुल गांधी ने मनरेगा को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि गरीब और मजदूर वर्ग के लिए सुरक्षा कवच है। सरकार इस योजना को कमजोर कर गरीबों से उनका आखिरी सहारा भी छीनना चाहती है। राहुल गांधी ने मनरेगा मजदूरों को भरोसा दिलाया कि कांग्रेस पार्टी उनके साथ खड़ी है और केंद्र सरकार की इस नीति को सफल नहीं होने देगी। उन्होंने साफ कहा कि मनरेगा को खत्म करने या कमजोर करने की कोशिशों के खिलाफ कांग्रेस पूरे देश में संघर्ष करेगी।
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रायबरेली के एक दिवसीय दौरे पर राहुल गांधी ने सुबह भुएमऊ गेस्ट हाउस में पार्टी पदाधिकारियों और आम लोगों से संवाद किया। इसके बाद उन्होंने सांसद निधि से कराए गए 31 विकास कार्यों का लोकार्पण और आठ नए कार्यों का शिलान्यास किया। राहुल गांधी ने आईटीआई कॉलोनी स्थित राजीव गांधी स्टेडियम में रायबरेली प्रीमियर लीग टी-20 क्रिकेट टूर्नामेंट का उद्घाटन कर युवाओं को खेल और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश दिया। इसके अलावा उन्होंने नगर पालिकाध्यक्ष शत्रोहन सोनकर के आवास पहुंचकर उनके परिवार को आशीर्वाद भी दिया।
दौरे का राजनीतिक केंद्र बिंदु रोहनिया ब्लॉक के उमरन गांव में आयोजित “मनरेगा बचाओ संग्राम” कार्यक्रम रहा। यहां राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस की सरकारों के दौरान मनरेगा की मूल भावना पंचायतों को मजबूत करना और गरीबों के लिए न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करना था। उनका कहना था कि कांग्रेस चाहती थी कि देश में कहीं भी मजदूर को तय न्यूनतम वेतन से कम न मिले, ताकि उसकी गरिमा बनी रहे। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार सत्ता का केंद्रीकरण कर रही है और निर्णय प्रक्रिया को नौकरशाही के हाथों में सौंप रही है, जिससे गरीबों की आवाज दबाई जा रही है।

राहुल गांधी ने यह भी कहा कि मनरेगा का नाम बदलना केवल प्रतीकात्मक मुद्दा नहीं है, बल्कि इससे गांधी जी की सोच का अपमान और गरीबों से मिलने वाली सुरक्षा को हटाने का संकेत मिलता है। उन्होंने दावा किया कि नरेंद्र मोदी देश की संपत्ति को कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों तक सीमित करना चाहते हैं, जबकि कांग्रेस जनता के हक और मजदूरों की सुरक्षा के लिए सड़क से संसद तक लड़ाई लड़ रही है।






















