Rahul Gandhi SIR Row: संसद में एक बार फिर चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान पर भाजपा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ऐसा जवाब दिया जिसने बहस को नए कोण दे दिए। रविशंकर प्रसाद ने न सिर्फ राहुल गांधी के आरोपों को खारिज किया, बल्कि SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर कांग्रेस की राजनीति पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि संसद में उन्होंने राहुल गांधी को विस्तार से जवाब दिया है और जो नेता सत्तारूढ़ दल की दलीलों का सामना नहीं कर पा रहे, वे गृह मंत्री अमित शाह जैसे अनुभवी नेता को क्या चुनौती देंगे।
रविशंकर प्रसाद ने बिहार का उदाहरण सामने रखते हुए पूछा कि SIR के दौरान क्या कहीं एक भी गड़बड़ी सामने आई। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने देश भर में दौरे किए, शोर मचाया, लेकिन चुनावी नतीजों में कांग्रेस को केवल पांच सीटों पर ही संतोष करना पड़ा। उनके मुताबिक अमित शाह ने सदन में तथ्यों के साथ यह स्पष्ट कर दिया कि SIR जैसी प्रक्रिया यूपीए सरकार के दौर में भी अपनाई जाती रही है। रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाते हुए कहा कि जब कांग्रेस जीतती है तो चुनाव आयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष लगता है, लेकिन जब हार होती है तो वही आयोग सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया जाता है। उनके शब्दों में यह लोकतंत्र की संस्थाओं को कमजोर करने वाली राजनीति है, जिसका कोई तार्किक जवाब नहीं दिया जा सकता।
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इसी मुद्दे पर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की सांसद शांभवी चौधरी ने भी राहुल गांधी के बयान को लेकर विपक्ष पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि SIR को लेकर किसी तरह की घबराहट नहीं है और विपक्ष जानबूझकर इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहा है। शांभवी चौधरी ने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र और संवैधानिक संस्था है और SIR उसी के दायित्व के तहत की जा रही प्रक्रिया है, ताकि भारतीय नागरिकों के मतदान अधिकार और अधिक मजबूत हो सकें। उनके अनुसार यह पूरी कवायद संविधान के तहत दिए गए अधिकारों को सुदृढ़ करने की दिशा में है, न कि किसी दल विशेष को लाभ पहुंचाने के लिए।
शांभवी चौधरी ने बिहार की राजनीतिक तस्वीर का जिक्र करते हुए कहा कि वहां की जनता INDI गठबंधन को पहले ही जवाब दे चुकी है और आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की जनता भी अपनी राय स्पष्ट करेगी। उनका यह बयान संकेत देता है कि सत्तापक्ष SIR को लोकतंत्र की मजबूती से जोड़कर देख रहा है, जबकि विपक्ष इसे चुनावी रणनीति के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है।






















