अंतरराष्ट्रीय पर्यटन नगरी राजगीर में आयोजित तीन दिवसीय राजगीर महोत्सव (Rajgir Mahotsav) का पहला दिन सिर्फ एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि बदलते बिहार की तस्वीर भी बन गया। पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन की ओर से आयोजित इस महोत्सव में जब पद्मश्री कैलाश खेर मंच पर पहुंचे तो राजगीर का पूरा माहौल संगीत, उत्साह और गर्व से भर उठा। हजारों दर्शकों की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि अब बिहार के सांस्कृतिक आयोजनों की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हो रही है।
अपने संबोधन में कैलाश खेर ने नालंदा की ऐतिहासिक विरासत को याद करते हुए कहा कि जब दुनिया के कई हिस्सों में विश्वविद्यालय की कल्पना भी नहीं थी, तब नालंदा ज्ञान का वैश्विक केंद्र था। उनके शब्दों में नालंदा सिर्फ अतीत नहीं, बल्कि भारत की बौद्धिक चेतना का प्रतीक है। उन्होंने राजगीर को साधु-संतों और बुद्धिजीवियों की नगरी बताते हुए इस भूमि को नमन किया। मंच से कही गई ये बातें स्थानीय लोगों के लिए सम्मान और आत्मविश्वास का स्रोत बन गईं।

कैलाश खेर ने अपने अनुभव साझा करते हुए बिहार के बदलते इंफ्रास्ट्रक्चर की भी तारीफ की। उन्होंने बताया कि पिछली बार पटना से राजगीर आने में करीब पांच घंटे लगे थे, लेकिन इस बार वही दूरी साढ़े तीन घंटे में पूरी हो गई। यह बदलाव उनके लिए बिहार की विकास यात्रा का प्रमाण था। उन्होंने कहा कि बिहार अब प्रगति और विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है, और यह बदलाव साफ तौर पर महसूस किया जा सकता है।

लाइव शो के दौरान कैलाश खेर ने अपने लोकप्रिय गीतों से समां बांध दिया। मंच के नीचे झूमते दर्शक, तालियों की गूंज और संगीत के साथ नाचती युवा पीढ़ी इस बात का संकेत थी कि राजगीर महोत्सव अब सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय पहचान बना रहा है। इसी दौरान जब कुछ युवतियां मंच के पास नृत्य कर रही थीं, तो कैलाश खेर ने उन्हें मंच पर बुलाकर उनके साथ डांस किया। यह पल दर्शकों के लिए खास बन गया। उन्होंने सभी के साथ ग्रुप फोटो खिंचवाया और उसे अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा करने का वादा भी किया, जिससे कार्यक्रम का यह क्षण सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आ गया।

कार्यक्रम के अंत में जिला प्रशासन की ओर से पद्मश्री कैलाश खेर को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उनके एक प्रशंसक ने अपनी हाथ से बनाई गई पेंटिंग उन्हें भेंट की, जिसे देखकर कैलाश खेर भावुक नजर आए।






















