Rajya Sabha Elections 2026: देश की राजनीति में एक बार फिर ऊपरी सदन यानी राज्यसभा को लेकर बड़ी हलचल शुरू हो गई है। अप्रैल 2026 में 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटें खाली होने जा रही हैं और इन्हीं सीटों के लिए Election Commission ने चुनाव की घोषणा कर दी है। यह चुनाव सिर्फ सांसद चुनने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि 2024 लोकसभा चुनाव के बाद संसद के शक्ति संतुलन की दिशा तय करने वाला अहम पड़ाव माना जा रहा है।
इन चुनावों में सबसे बड़ा दांव सत्तारूढ़ NDA और विपक्षी INDIA गठबंधन दोनों के लिए प्रतिष्ठा से जुड़ गया है। NDA जहां ऊपरी सदन में अपनी संख्या बढ़ाकर निर्णायक स्थिति में पहुंचना चाहता है, वहीं INDIA गठबंधन को डर है कि उसकी ताकत कमजोर पड़ सकती है। यही वजह है कि मार्च में होने वाला यह चुनाव राजनीतिक गलियारों में ‘सेमीफाइनल’ की तरह देखा जा रहा है।
महाराष्ट्र इस बार राज्यसभा चुनाव का सबसे बड़ा अखाड़ा बनने जा रहा है। यहां से सात सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, जिनमें एनसीपी (एसपी) प्रमुख Sharad Pawar, आरपीआई नेता रामदास आठवले और शिवसेना (यूबीटी) की प्रियंका चतुर्वेदी जैसे चर्चित नाम शामिल हैं। तमिलनाडु में भी छह सीटें खाली हो रही हैं, जहां डीएमके और एआईएडीएमके के बीच कड़ा मुकाबला तय माना जा रहा है।
इसके अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, असम, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और हरियाणा जैसे राज्यों में भी सीटें खाली हो रही हैं। इन राज्यों के विधानसभा समीकरण ही तय करेंगे कि किस गठबंधन को कितनी बढ़त मिलेगी।
फिलहाल Bharatiya Janata Party के पास राज्यसभा में 103 सांसद हैं और NDA की कुल संख्या 133 के आसपास है। पार्टी के अंदरखाने उम्मीद जताई जा रही है कि इस चुनाव के बाद उसकी स्थिति और मजबूत होगी। खासकर महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों में विधानसभा में मजबूत संख्या होने का सीधा फायदा BJP को मिल सकता है।
महाराष्ट्र में बीजेपी के पास 131 विधायक हैं और उसके सहयोगी दल शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (अजित पवार गुट) के साथ मिलकर महायुति की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। वहीं बिहार में NDA के पास करीब 89 विधायक हैं, जिससे राज्यसभा चुनाव में उसे बढ़त मिलने की संभावना है। असम और ओडिशा जैसे राज्यों में भी बीजेपी गठबंधन की स्थिति विपक्ष से बेहतर मानी जा रही है।
हालांकि, तस्वीर इतनी आसान भी नहीं है। NDA के भीतर सीटों को लेकर तालमेल एक बड़ी चुनौती बनेगा। महाराष्ट्र में शिंदे गुट की शिवसेना और एनसीपी के बीच उम्मीदवारों को लेकर खींचतान तय मानी जा रही है। बिहार में चिराग पासवान की पार्टी की बढ़ती राजनीतिक मौजूदगी भी समीकरण बदल सकती है। ऐसे में BJP को अपने सहयोगियों को साधते हुए संतुलन बनाना होगा।
विपक्षी INDIA गठबंधन के लिए यह चुनाव कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके और राजद जैसी पार्टियों की संख्या इस बार घट सकती है। महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (एसपी) को नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि विधानसभा में उनका जनाधार पहले से कमजोर हो चुका है।
हालांकि, कुछ राज्यों में INDIA गठबंधन को राहत भी मिल सकती है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की विधानसभा में मजबूत स्थिति है और वहां उसकी सीटें सुरक्षित मानी जा रही हैं। तमिलनाडु में डीएमके गठबंधन के पास बहुमत है, जिससे उसे भी फायदा मिलने की उम्मीद है। तेलंगाना में कांग्रेस की सरकार होने के कारण वहां से भी विपक्ष को बढ़त मिल सकती है।
माना जा रहा है कि इस बार का राज्यसभा चुनाव सिर्फ संख्या का खेल नहीं होगा, बल्कि यह यह भी दिखाएगा कि INDIA गठबंधन अंदर से कितना एकजुट है। हाल के महीनों में कई राज्यों में सीट शेयरिंग और नेतृत्व को लेकर मतभेद सामने आए हैं। ऐसे में यह चुनाव विपक्ष की एकता की असली परीक्षा साबित हो सकता है।
एक और दिलचस्प पहलू यह है कि कई बड़े चेहरे इस चुनाव के बाद राज्यसभा से बाहर हो जाएंगे। बिहार से उपेंद्र कुशवाहा, पश्चिम बंगाल से साकेत गोखले और तेलंगाना से अभिषेक मनु सिंघवी जैसे नेता भी इस सूची में हैं। वहीं BJP नए चेहरों को ऊपरी सदन में भेजने की तैयारी कर रही है, जिससे संगठनात्मक संतुलन और युवा नेतृत्व को जगह मिल सके।
कुल मिलाकर, 10 राज्यों की 37 सीटों पर होने वाला यह चुनाव आने वाले दो वर्षों की संसदीय राजनीति की दिशा तय कर सकता है। अगर NDA अपनी संख्या बढ़ाने में सफल होता है तो सरकार के लिए कानून पास कराना आसान होगा। वहीं INDIA गठबंधन के कमजोर पड़ने से विपक्ष की भूमिका सीमित हो सकती है।






















