राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM Big Reshuffle) ने एक बड़ा और चौंकाने वाला कदम उठाते हुए पार्टी की प्रदेश इकाई, सभी जिला इकाइयों और प्रकोष्ठों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। यह निर्णय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा की अध्यक्षता में हुई कोर कमेटी की बैठक में लिया गया, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा और संभावनाओं को जन्म दे दिया है।
कुशवाहा के इस कदम को संगठन में नई ऊर्जा, नई संरचना और नए नेतृत्व की तलाश के रूप में देखा जा रहा है। रालोमो लंबे समय से अपने राजनीतिक प्रभाव को मजबूत करने की कवायद में है, और ऐसे में यह निर्णय पार्टी के अंदर व्यापक पुनर्गठन की दिशा में सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं प्रवक्ता फजल इमाम मल्लिक ने बताया कि संगठन को सुचारू रूप से चलाने के लिए पांच सदस्यीय संचालन समिति का गठन किया गया है, जो अंतरिम ढांचे के तहत पार्टी के सभी कार्यक्रमों और गतिविधियों को संभालेगी।
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इस संचालन समिति का नेतृत्व मदन चौधरी करेंगे, जबकि सुभाष चंद्रवंशी, प्रशांत पंकज, हिमांशु पटेल और आरके सिन्हा को सदस्य बनाया गया है। यह समिति प्रदेश से लेकर जिला स्तर तक नई टीमों के गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी और तब तक पार्टी की कमान संभाले रहेगी जब तक कि नई स्थायी संगठनात्मक संरचना सामने नहीं आ जाती।
रालोमो नेतृत्व को उम्मीद है कि यह कदम पार्टी को न केवल भीतर से मजबूती देगा बल्कि आगामी राजनीतिक चुनौतियों से निपटने में भी नई धार प्रदान करेगा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस बदलाव से कुशवाहा यह संकेत देना चाहते हैं कि पार्टी व्यापक बदलाव की ओर बढ़ रही है और नए राजनीतिक समीकरणों के अनुसार खुद को ढाल रही है। बिहार में तेजी से बदलते राजनीतिक माहौल में यह कदम रालोमो के लिए अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का एक रणनीतिक प्रयास भी माना जा रहा है।
कोर कमेटी की इस महत्वपूर्ण बैठक में माधव आनंद, आलोक सिंह, रामपुकार सिन्हा, जंगबहादुर सिंह, अंगद कुशवाहा और स्मृति कुमुद जैसे वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे, जिनकी मौजूदगी यह बताती है कि संगठनात्मक बदलाव पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की पूर्ण सहमति और रणनीति का हिस्सा है।






















