दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में कांग्रेस पार्टी का ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ (Congress Vote Chori Protest) विरोध प्रदर्शन सिर्फ एक रैली नहीं, बल्कि आने वाले राजनीतिक संघर्ष का स्पष्ट संकेत बनकर उभरा। कर्नाटक कांग्रेस के सभी विधायक और देशभर से पहुंचे एक हजार से अधिक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने यह दिखा दिया कि पार्टी कथित वोट चोरी के मुद्दे को अब राज्य नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एजेंडे के रूप में आगे बढ़ाने के मूड में है। कांग्रेस नेतृत्व इसे लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई बताते हुए केंद्र सरकार और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका पर सवाल खड़े कर रहा है।
इस प्रदर्शन की राजनीतिक अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि कांग्रेस इसे अपने व्यापक विरोध अभियान की अगली कड़ी मान रही है। पार्टी का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया को कमजोर कर लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ समझौता किया जा रहा है। रामलीला मैदान से दिया गया संदेश साफ था कि कांग्रेस अब सड़क से संसद तक इस मुद्दे पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।

रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने आरएसएस और बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला और दावा किया कि कांग्रेस “आरएसएस की सरकार को हिंदुस्तान से हटाएगी।” उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के कथित बयान का जिक्र करते हुए विचारधारात्मक टकराव को और धार दी। राहुल गांधी ने कहा कि दुनिया की हर विचारधारा सत्य को सर्वोपरि मानती है, लेकिन आरएसएस की सोच में सत्य नहीं, शक्ति को महत्व दिया जाता है। उनके मुताबिक देश में चल रही राजनीतिक लड़ाई असल में सत्य और असत्य के बीच की लड़ाई है।
राहुल गांधी ने वोट चोरी को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कथित तौर पर ₹10,000 देकर वोटों को प्रभावित किया जाता है। उन्होंने संसद में इस मुद्दे पर जवाब मांगने के दौरान गृह मंत्री अमित शाह की प्रतिक्रिया का हवाला देते हुए दावा किया कि सत्ता पक्ष के पास इन आरोपों का कोई ठोस जवाब नहीं है। इस बयान के जरिए कांग्रेस ने यह संकेत देने की कोशिश की कि सरकार नैतिक और राजनीतिक दबाव में है।
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रैली के दौरान राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ज्ञानेश कुमार, डॉ. सुखबीर सिंह साधू और डॉ. विवेक जोशी का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि आयोग बीजेपी सरकार के साथ मिलकर काम कर रहा है। कांग्रेस का कहना है कि यदि चुनावी संस्थाएं स्वतंत्र रूप से काम नहीं करेंगी, तो लोकतंत्र की जड़ें कमजोर होंगी।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी मंच से बीजेपी और आरएसएस पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष जानबूझकर समाज में वैचारिक विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहा है। खड़गे ने कहा कि बीजेपी डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों के खिलाफ माहौल बनाती है और सरदार वल्लभभाई पटेल तथा पंडित नेहरू के बीच कथित मतभेदों को उभारकर इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करना चाहती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस इस साजिश को सफल नहीं होने देगी।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को जनता की सुरक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ते हुए लोगों से सीधे अपील की। उन्होंने बीजेपी और आरएसएस को “गद्दार लोग” करार देते हुए कहा कि अगर देश को सुरक्षित और मजबूत बनाना है तो ऐसे लोगों को सत्ता से हटाना जरूरी है। उनका यह बयान साफ तौर पर कांग्रेस के आक्रामक चुनावी रुख को दर्शाता है।






















