बिहार की राजनीति में एक बार फिर सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग का मुद्दा चर्चा के केंद्र में आ गया है। इस बार सवाल सीधे राष्ट्रीय जनता दल के एक पूर्व विधायक और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की पार्टी से जुड़े चेहरे को लेकर उठे हैं। अलौली विधानसभा सीट से राजद के पूर्व विधायक रामवृक्ष सदा (Ramvriksh Sada Controversy) और उनके परिवार पर आरोप है कि उन्होंने गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए चलाई जा रही योजनाओं का लाभ लिया, जबकि वे स्वयं जनप्रतिनिधि रह चुके हैं। यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं दिखता, बल्कि सरकारी निगरानी तंत्र और पात्रता की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
मामला सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। आरोपों के अनुसार, पूर्व विधायक रहते हुए भी रामवृक्ष सदा के परिवार का नाम राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत जारी राशन कार्ड में बना रहा। उनकी पत्नी सुशीला देवी के नाम से जारी राशन कार्ड में छह सदस्यों का नाम दर्ज है, जिसके आधार पर हर महीने गेहूं और चावल का नियमित उठाव किया जाता रहा। रिकॉर्ड यह संकेत देते हैं कि दिसंबर 2025 तक भी उनके नाम पर अनाज का वितरण हुआ है, जो यह सवाल उठाता है कि जनप्रतिनिधि बनने के बाद परिवार को इस योजना से बाहर क्यों नहीं किया गया।
इतना ही नहीं, विवाद यहीं खत्म नहीं होता। वर्ष 2023 में पूर्व विधायक के बेटे रामानंद सदा के नाम मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान स्वीकृत किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इस योजना का उद्देश्य भूमिहीन, बेघर और अत्यंत गरीब परिवारों को आवास सुविधा देना है, लेकिन एक पूर्व विधायक के पुत्र को इसका लाभ मिलना सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर बहस को जन्म दे रहा है। बैंक रिकॉर्ड के मुताबिक, आवास निर्माण के लिए तीन किस्तों में 1.20 लाख रुपये की राशि खाते में भेजी गई और मकान का निर्माण भी कराया गया।
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स्थानीय स्तर पर राशन वितरण से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि सुशीला देवी के नाम जारी राशन कार्ड पर अनाज का उठाव लगातार होता रहा है। वहीं प्रशासनिक अधिकारी इस पूरे मामले को पुराना बताते हुए जांच के बाद स्थिति स्पष्ट होने की बात कह रहे हैं। इससे यह सवाल भी उठता है कि अगर मामला पहले से संज्ञान में था, तो कार्रवाई में देरी क्यों हुई।
राजनीतिक दबाव बढ़ने के बीच पूर्व विधायक रामवृक्ष सदा ने आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्हें बेटे को आवास योजना का लाभ मिलने की जानकारी नहीं थी और राशन कार्ड से उनका नाम पहले ही कटवा दिया गया था। हालांकि उनके बेटे रामानंद सदा ने यह स्वीकार किया है कि उन्हें आवास योजना का लाभ मिला है और घर भी बन चुका है। उनका दावा है कि पिता उनसे अलग रहते हैं और राशन कार्ड से नाम हटाने के लिए आवेदन भी दिया गया था।






















