संसद में सोमवार को वक्फ संशोधन विधेयक पर गरमा-गरम बहस हुई। भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने विपक्ष पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि वह खुद अपनी बातों में उलझा हुआ है—एक तरफ वह संशोधन की मांग करता है, दूसरी तरफ इसका विरोध करता है। उन्होंने संविधान की दुहाई देते हुए विधेयक के समर्थन में ठोस दलीलें पेश कीं और विपक्ष को अपने ही तर्कों के जाल में फंसाने की कोशिश की।
“संविधान की लाल किताब और हमारी हरी किताब”
रविशंकर प्रसाद ने तंज कसते हुए कहा कि “आजकल संसद में संविधान की लाल किताब बहुत घूम रही है। जब भी कोई विषय आता है, उसे लहराया जाता है। लेकिन हम संविधान की हरी किताब लेकर आए हैं, जो संसद में रखी हुई है, और मैं उसी को दिखाऊंगा!” उन्होंने संविधान की धारा 15 का हवाला देते हुए कहा कि यह अनुच्छेद महिलाओं और पिछड़े वर्गों के अधिकारों की सुरक्षा करता है। उन्होंने सवाल उठाया, “अगर यह वक्फ बिल देश की महिलाओं को अधिकार देने के लिए लाया जा रहा है, तो यह असंवैधानिक कैसे हो गया?” उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पिछड़े मुसलमानों को वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।
“विपक्ष केवल राजनीति कर रहा है!”
विपक्ष की आपत्तियों को सिरे से खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि “ये लोग दिल से तो संशोधन चाहते हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक मजबूरी उन्हें पीछे खींचती है।” उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह मुस्लिम समाज को सुधारों से वंचित रखना चाहता है, क्योंकि वह इसे अपना “वोट बैंक” मानता है।
“वक्फ कोई धार्मिक संस्था नहीं, बल्कि एक कानूनी निकाय है”
प्रसाद ने स्पष्ट किया कि वक्फ एक वैधानिक निकाय है, न कि धार्मिक संस्था। उन्होंने इस्लामी कानून के प्रसिद्ध विद्वान मुल्ला की किताब से उद्धरण देते हुए कहा कि मुतवल्ली (वक्फ संपत्ति का प्रबंधक) केवल एक मैनेजर होता है, मालिक नहीं। उन्होंने सवाल किया, “अगर वक्फ की संपत्ति लूटी जा रही है, कब्जे हो रहे हैं, तो सरकार चुप कैसे बैठ सकती है?”
“वक्फ की जमीनें, लेकिन जनहित के लिए क्या हुआ?”
रविशंकर प्रसाद ने तीखे सवाल उठाते हुए पूछा,
- “वक्फ की 8 लाख एकड़ संपत्ति है, लेकिन कितने स्कूल खोले गए?”
- “कितने अस्पताल बनाए गए?”
- “कितने अनाथालय या स्किल सेंटर खोले गए?”
- “क्या यह संपत्ति केवल कुछ गिने-चुने लोगों के लिए है, या इसका लाभ पूरे समाज को मिलना चाहिए?”
“शाहबानो से लेकर तीन तलाक तक – विपक्ष का दोहरा रवैया”
उन्होंने इतिहास के उदाहरण देते हुए कहा कि जब शाहबानो को गुजारा भत्ता देने का सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया, तो विपक्षी दलों ने उसे पलटने के लिए कानून बना दिया। “महज 75 साल की विधवा को कुछ रुपए देने पर इतना हंगामा मचाया गया।” उन्होंने तीन तलाक के मुद्दे पर भी कहा कि विपक्ष ने जानबूझकर इस मामले को वर्षों तक टाला और महिलाओं को न्याय से वंचित रखा।
“हमने मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाया”
उन्होंने गर्व के साथ कहा कि मोदी सरकार ने आते ही सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक पर जवाब दाखिल किया और इस प्रथा को खत्म करने का ऐतिहासिक फैसला लिया। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा, “ये लोग तो कहते थे कि हम निकाहनामे में तीन तलाक के खिलाफ शर्त जोड़ देंगे, लेकिन जब कानून बनाने की बारी आई, तो पीछे हट गए!”
“विपक्ष की चालें बेनकाब!”
रविशंकर प्रसाद के इस जोरदार भाषण से संसद में हंगामा मच गया। विपक्ष ने इसका विरोध किया, लेकिन भाजपा सांसद ने बार-बार तर्कों से यह साबित करने की कोशिश की कि वक्फ संशोधन विधेयक जरूरी है। उन्होंने कहा, “यह विधेयक केवल संपत्तियों को सही तरीके से प्रबंधित करने और मुस्लिम समाज को उनका वास्तविक हक दिलाने के लिए लाया गया है।”