बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Politics) में करारी हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल के भीतर लंबे समय से सुलग रही असंतोष की चिंगारी अब सार्वजनिक रूप लेती दिख रही है। पार्टी के वरिष्ठ विधायक भाई वीरेंद्र के ताजा बयान ने न केवल RJD की रणनीतिक कमजोरियों को उजागर किया है, बल्कि यह भी साफ कर दिया है कि चुनावी नतीजों को लेकर पार्टी के अंदर आत्ममंथन की जगह आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब तेजस्वी यादव पार्टी को नए सिरे से खड़ा करने की कोशिश में जुटे हैं।
भाई वीरेंद्र ने टिकट वितरण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी ने जमीनी स्तर पर मजबूत और स्थानीय नेताओं की अनदेखी की, जबकि दूसरे जिलों से आए प्रत्याशियों को तरजीह दी गई। उनका तर्क था कि जिन चेहरों को जनता वर्षों से जानती और पहचानती है, उन्हें दरकिनार करने से मतदाताओं में भ्रम और नाराजगी पैदा हुई। इसका सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ा और पार्टी विधानसभा में वह प्रभाव नहीं बना सकी, जिसकी उम्मीद की जा रही थी।
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राजद विधायक का यह बयान महज एक व्यक्ति की नाराजगी नहीं, बल्कि उस व्यापक असंतोष का संकेत माना जा रहा है, जो हार के बाद पार्टी के भीतर उभर रहा है। भाई वीरेंद्र की टिप्पणी पर भाजपा ने तुरंत पलटवार किया। पार्टी प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि अब राजद के अपने विधायक ही टिकट वितरण को हार की बड़ी वजह बता रहे हैं। उन्होंने तेजस्वी यादव से जवाब मांगते हुए कहा कि जब पार्टी के भीतर से ही सवाल उठ रहे हैं, तो हर बार ईवीएम या चुनाव आयोग पर दोष मढ़ने की राजनीति कितनी उचित है। नीरज कुमार ने तंज कसते हुए कहा कि यह बयान RJD की अंदरूनी कलह और नेतृत्व संकट को उजागर करता है।
भाजपा का यह हमला राजनीतिक तौर पर अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे वह विपक्ष की एकजुटता पर सवाल खड़े कर रही है। साथ ही, यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि राजद अपनी हार के कारणों को स्वीकार करने के बजाय बहाने तलाशने में लगी रही है। वहीं, राजद के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि सार्वजनिक असहमति पार्टी की छवि और भविष्य की रणनीति दोनों को प्रभावित कर सकती है।






















