बिहार की राजनीति में चर्चित चेहरा और राजद नेता कर्णवीर सिंह यादव उर्फ लल्लू मुखिया (Lallu Mukhia Surrender) आखिरकार क़ानून के सामने हाजिर हो गए। हत्या के एक मामले में फरार चल रहे लल्लू मुखिया ने उच्च न्यायालय से जमानत याचिका खारिज होने के बाद शनिवार को व्यवहार न्यायालय बाढ़ में आत्मसमर्पण कर दिया। उनके सरेंडर करने के ठीक छह घंटे बाद न्यायिक प्रक्रिया के तहत उन्हें बाढ़ जेल भेज दिया गया, जिससे लंबे समय से जारी पुलिस की तलाश और कानूनी अदालती जद्दोजहद का अंत हुआ।

बाढ़ विधानसभा से प्रत्याशी रहे लल्लू मुखिया चुनाव के बाद अचानक फरार हो गए थे। गिरफ्तारी के भय से वे भूमिगत रहे, जबकि पुलिस लगातार उनकी तलाश में छापेमारी कर रही थी। यहां तक कि चुनाव से पहले पुलिस ने उनके घर की कुर्की भी कर दी थी, बावजूद इसके लल्लू मुखिया सामने नहीं आए। इस राजनीतिक तनाव और कानूनी दबाव के बीच सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें कुछ महीनों की राहत देते हुए गिरफ्तारी पर अस्थायी रोक लगा दी थी, जिससे वे चुनाव प्रचार जारी रख सके।
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हालांकि राहत अवधि समाप्त होते ही कानूनी शिकंजा दोबारा कसने लगा। जमानत याचिका खारिज होने के बाद उनके पास आत्मसमर्पण के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। इसके बाद वे शनिवार को बाढ़ कोर्ट पहुंचे और औपचारिक रूप से सरेंडर कर दिया। बताया जाता है कि 2023 में हत्या के जिस मामले में उन्हें आरोपी बनाया गया था, उसमें वे अप्राथमिक अभियुक्त के रूप में शामिल थे। इसी आरोप को लेकर वे लगातार मुंगेर सांसद ललन सिंह पर राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के तहत केस में फंसाने का गंभीर आरोप लगाते रहे हैं।

कभी बाहुबली नेता अनंत सिंह के बेहद करीबी माने जाने वाले लल्लू मुखिया चुनावी समीकरणों में हमेशा प्रभावशाली भूमिका निभाते रहे हैं। लेकिन हत्या केस में उनका नाम आते ही राजनीतिक गलियारों से लेकर पार्टी संगठन तक में हलचल मच गई थी। सरेंडर के बाद अब यह मामला फिर सुर्खियों में लौट आया है और आने वाले दिनों में अदालत की प्रक्रिया के साथ-साथ इसका राजनीतिक प्रभाव भी देखने को मिल सकता है।



















