Rohini Acharya: राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के परिवार में लंबे समय से चल रहे तनाव और सार्वजनिक विवादों के बीच अब एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने राजनीति से हटकर भावनाओं को केंद्र में ला दिया है। परिवारिक कलह, आरोप-प्रत्यारोप और अपमान के दर्द से गुजर चुकीं रोहिणी आचार्या के घर अब गर्व और खुशी का माहौल है। वजह है उनके बड़े बेटे आदित्य का देश की सेवा के लिए पहला कदम, यानी बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग के लिए रवाना होना।
रोहिणी आचार्या ने इस खास पल को सोशल मीडिया के जरिए साझा किया है। उन्होंने अपने बेटे के मिलिट्री ट्रेनिंग के लिए जाते समय की तस्वीरें पोस्ट करते हुए एक ऐसा संदेश लिखा, जो सिर्फ एक मां की भावना नहीं बल्कि जीवन दर्शन भी झलकाता है। रोहिणी ने लिखा कि प्री-यूनिवर्सिटी की पढ़ाई पूरी करने के बाद 18 साल की उम्र में आदित्य दो साल की बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग के लिए गया है और यह उनके लिए गर्व का क्षण है।
अपने संदेश में रोहिणी आचार्या ने बेटे को बहादुर, साहसी और अनुशासनप्रिय बताते हुए उसे जीवन की बड़ी सीख दी। उन्होंने लिखा कि हमेशा याद रखना, जीवन की सबसे कठिन लड़ाइयों में ही योद्धा बनते हैं। यह पंक्तियां सिर्फ आदित्य के लिए नहीं, बल्कि उस संघर्ष की भी प्रतीक हैं, जिससे खुद रोहिणी हाल के वर्षों में गुजरी हैं। इस भावुक पोस्ट को उनके भाई तेजप्रताप यादव ने भी रीपोस्ट किया है, जिसे परिवार के भीतर भावनात्मक जुड़ाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
यह पोस्ट ऐसे समय में सामने आई है, जब रोहिणी आचार्या का नाम पिछले कुछ समय से पारिवारिक विवादों और राजनीतिक बयानबाजी के कारण चर्चा में रहा है। बिहार विधानसभा चुनाव के बाद उन्होंने खुलकर परिवार और पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके साथ अपमानजनक व्यवहार हुआ, यहां तक कि उन पर चप्पल से हमला किया गया और उन्हें घर छोड़ने के लिए मजबूर किया गया। उस वक्त उन्होंने अपने भाई तेजस्वी यादव, सांसद संजय यादव और रमीज नीमत का नाम लेकर गंभीर आरोप लगाए थे।
रोहिणी आचार्या ने यह भी कहा था कि राजद की करारी हार और विधानसभा में पार्टी के सिमट जाने की नैतिक जिम्मेदारी कुछ नेताओं को लेनी चाहिए। इसी अपमान के बाद उन्होंने 10 सर्कुलर रोड स्थित माता-पिता का आवास छोड़ दिया था और सार्वजनिक रूप से राजनीति से दूरी बनाने की घोषणा की थी। यह वही रोहिणी आचार्या हैं, जिन्होंने अपने पिता लालू प्रसाद यादव की जान बचाने के लिए किडनी दान कर देशभर में सहानुभूति और सम्मान हासिल किया था।
राजनीति में भी उन्होंने अपनी किस्मत आजमाई और सारण लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उनका सार्वजनिक जीवन विवादों और व्यक्तिगत संघर्षों से घिरता चला गया। ऐसे में बेटे की मिलिट्री ट्रेनिंग से जुड़ी यह खबर उनके जीवन में एक नए अध्याय की शुरुआत के तौर पर देखी जा रही है।






















