नई दिल्ली: संसद में पेश किए गए वक्फ संशोधन विधेयक (Waqf Amendment Bill) को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। लोकसभा में इस बिल को पेश करने के दौरान विपक्षी दलों ने जमकर हंगामा किया। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री किरेन रिजिजू ने विधेयक की अहमियत बताते हुए कहा कि “अगर यह बिल नहीं लाया जाता, तो आज जिस संसद भवन में हम बहस कर रहे हैं, वह भी वक्फ संपत्ति होता।”
क्या कहा केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने?
विधेयक पेश करते हुए केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने 2013 के कुछ फैसलों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 2013 में 123 स्थानों को डिनोटिफाई कर दिया गया, जिससे वक्फ बोर्ड की दावेदारी हो गई। इन स्थानों में वसंत कुंज, दिल्ली एयरपोर्ट और यहां तक कि संसद परिसर भी शामिल था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संशोधन इसलिए लाया गया ताकि किसी भी सरकारी या निजी संपत्ति पर वक्फ बोर्ड द्वारा दावा न किया जा सके।
मंत्री ने जोर देकर कहा कि “1970 से ही वक्फ बोर्ड कई अहम सरकारी जमीनों पर दावा करता आ रहा था। 2013 में लिए गए फैसलों की वजह से कई स्थानों पर कानूनी विवाद शुरू हो गए। अगर मोदी सरकार यह संशोधन विधेयक नहीं लाती, तो संसद भवन और कई अहम सरकारी परिसरों पर वक्फ बोर्ड का अधिकार हो सकता था।”
क्यों विवादों में घिरा है यह विधेयक?
विपक्ष इस विधेयक को लेकर केंद्र सरकार पर हमलावर हो गया है। कांग्रेस, आरजेडी और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि यह विधेयक मुस्लिम समुदाय की धार्मिक संपत्तियों और अधिकारों में हस्तक्षेप करने के लिए लाया गया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार धार्मिक ध्रुवीकरण कर रही है और ‘वक्फ कानून’ को कमजोर कर रही है।
हालांकि, सरकार ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि इस विधेयक का मकसद केवल कानूनी स्पष्टता लाना और सरकारी संपत्तियों को अनुचित दावों से बचाना है।
विपक्ष का पलटवार
आरजेडी, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस बिल का विरोध किया। विपक्ष का कहना है कि सरकार बिना किसी बड़े विवाद या सार्वजनिक चर्चा के इस विधेयक को पारित करवाना चाहती है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि “यह विधेयक असंवैधानिक है। भाजपा सरकार नागपुर का कानून थोपना चाहती है, जिसे हम कभी स्वीकार नहीं करेंगे। यह देश की गंगा-जमुनी तहजीब पर हमला है।”
वहीं, जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर ने भी विधेयक की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “सरकार इस बिल को जल्दबाजी में ला रही है। अगर किसी समुदाय को इससे खतरा महसूस हो रहा है, तो उन्हें विश्वास में लेना जरूरी था।”