बिहार के सहरसा जिले में आयोजित श्री चंडी महोत्सव (Chandi Mahotsav Controversy) उस वक्त चर्चा के केंद्र में आ गया, जब धार्मिक आस्था के इस मंच पर राजनीतिक असंतोष खुलकर सामने आ गया। सोनवर्षा प्रखंड के चंडी स्थान विराटपुर में चल रहे इस महोत्सव के दौरान महिषी से राष्ट्रीय जनता दल के विधायक गौतम कृष्ण मंच पर संबोधन का अवसर न मिलने से नाराज हो गए और सार्वजनिक रूप से अपनी आपत्ति दर्ज कराई। घटना ने न सिर्फ आयोजन स्थल पर मौजूद लोगों को असहज कर दिया, बल्कि पूरे जिले के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस छेड़ दी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महोत्सव के कार्यक्रम में जब मंच से विभिन्न अतिथियों और पदाधिकारियों का संबोधन कराया गया, उस दौरान विधायक गौतम कृष्ण को बोलने का अवसर नहीं दिया गया। इसे लेकर विधायक ने मंच पर ही आपत्ति जताई और कार्यक्रम के संचालन पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि उन्हें जानबूझकर आमंत्रित किया गया, लेकिन सम्मान और प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। उनका आरोप था कि मंच पर लगे नाम-पट्ट में भी उनका नाम शामिल नहीं किया गया, जो एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के तौर पर उनका अपमान है।
विधायक गौतम कृष्ण ने यह भी सवाल उठाया कि क्या किसी पदाधिकारी के संबोधन के बाद कार्यक्रम समाप्त मान लिया जाता है, जबकि वे स्वयं जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि हैं। उन्होंने मंच पर मौजूद अन्य जनप्रतिनिधियों का हवाला देते हुए समान सम्मान की मांग की। इस दौरान माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया, हालांकि मंच पर मौजूद लोगों और आयोजकों ने स्थिति को संभालने का प्रयास किया।

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान जिले के कई वरिष्ठ अधिकारी भी कार्यक्रम स्थल पर मौजूद थे, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील हो गया। धार्मिक आयोजन में इस तरह का राजनीतिक विवाद सामने आने से स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखी गई। कई लोगों का मानना है कि आस्था और परंपरा से जुड़े आयोजनों में सभी आमंत्रित अतिथियों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए, ताकि आयोजन की गरिमा बनी रहे। हालांकि, घटना के बाद आयोजकों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन यह विवाद श्री चंडी महोत्सव जैसे प्रतिष्ठित धार्मिक आयोजन की व्यवस्थाओं पर सवाल जरूर खड़े करता है।






















