उप मुख्यमंत्री और गृह मंत्री सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary) के एक बयान ने न सिर्फ सियासी हलकों में हलचल मचा दी है, बल्कि प्रशासनिक और वैचारिक स्तर पर भी नई बहस छेड़ दी है। एक निजी न्यूज़ चैनल के कार्यक्रम में उन्होंने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की कथित जब्त संपत्तियों को लेकर ऐसा दावा किया, जिसने सत्ता और विपक्ष के बीच खाई और चौड़ी कर दी है।
सम्राट चौधरी ने कहा कि लालू प्रसाद यादव के खिलाफ चारा घोटाले सहित कई मामलों में केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा की गई कार्रवाई के तहत जो संपत्तियां अटैच की गई हैं, उनका इस्तेमाल राज्य सरकार जनहित में करेगी। उनका दावा था कि इन परिसंपत्तियों में स्कूल खोले जाएंगे ताकि समाज को सीधा लाभ मिल सके। उन्होंने पटना जू के पास स्थित एक ऐसे भवन का जिक्र किया, जो बीते करीब दो दशकों से बंद पड़ा है। उनके अनुसार, उस भवन का जीर्णोद्धार कर उसमें स्कूल शुरू किया जाएगा, जिससे न सिर्फ बच्चों की पढ़ाई का रास्ता खुलेगा बल्कि यह संदेश भी जाएगा कि अवैध संपत्ति का उपयोग अब सामाजिक भलाई के लिए होगा।
इस बयान को केवल राजनीतिक आरोप तक सीमित न रखते हुए गृह मंत्री ने इसे कानून-व्यवस्था से जोड़ दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिहार में अपराधियों के लिए अब कोई जगह नहीं है। सरकार आम नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मानते हुए अपराधियों, माफियाओं और सूदखोरों पर निर्णायक कार्रवाई करेगी। खास तौर पर अवैध रूप से ऊंचे ब्याज पर पैसे देने वाले तथाकथित गुंडा बैंक चलाने वालों को लेकर उन्होंने सख्त चेतावनी दी।
सम्राट चौधरी के एक्शन मोड में EOU की स्पेशल टास्क फोर्स.. अवैध संपत्तियों तक पहुंचेगा कानून
सम्राट चौधरी ने आगे कहा कि सरकार की कार्रवाई केवल छोटे अपराधियों तक सीमित नहीं रहेगी। बालू माफिया, भूमि माफिया और परीक्षा माफिया जैसे संगठित अपराधों के खिलाफ भी कठोर कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि ऐसे मामलों में गिरफ्तारी के बाद तीन से छह महीने के भीतर स्पीडी ट्रायल के जरिए सजा सुनिश्चित की जाएगी। उनका कहना था कि गैरकानूनी तरीके से अर्जित संपत्तियों को जब्त कर समाजोपयोगी कार्यों में लगाया जाएगा और चाहे अपराधी कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसे जेल जाना ही होगा। उनके मुताबिक, यह महज बयानबाजी नहीं बल्कि सरकार की स्पष्ट कार्ययोजना है।
गृह मंत्री के इस आक्रामक रुख के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला तेज हो गया। सत्तारूढ़ एनडीए के सहयोगी दल जेडीयू ने सम्राट चौधरी के बयान का समर्थन करते हुए इसे सामाजिक न्याय से जोड़ा। जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि लालू परिवार पर नौकरी के बदले जमीन लेने जैसे गंभीर आरोप पहले से मौजूद हैं, इसलिए जब्त संपत्तियों का उपयोग समाज के कमजोर वर्गों के लिए होना चाहिए। उनके अनुसार, ऐसी परिसंपत्तियों में स्कूलों के साथ-साथ अनाथालय और छात्रावास भी खोले जा सकते हैं।
वहीं, विपक्षी राजद ने इस पूरे मुद्दे को राजनीतिक ध्यान भटकाने की कोशिश बताया। राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि राज्य में एनडीए सरकार बनी है, इसलिए उसे बयानबाजी के बजाय शासन और विकास पर ध्यान देना चाहिए। उनका आरोप था कि सरकार असली मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए लालू यादव की संपत्ति को लेकर बयान दे रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब राज्य के कई मौजूदा स्कूल बुनियादी सुविधाओं और शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं, तो नए स्कूल खोलने की बातें कितनी व्यवहारिक हैं।






















