बिहार की राजनीति में इन दिनों कानून, न्याय और संवेदनशील मामलों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। इसी बीच उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary Statement) ने यूजीसी कानून, लालू परिवार से जुड़े लैंड फॉर जॉब मामले और अजीत पवार के कथित प्लेन क्रैश प्रकरण पर अपनी प्रतिक्रिया देकर सरकार का रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने साफ कहा कि लोकतंत्र में न्यायपालिका के आदेश सर्वोपरि होते हैं और सरकार हर हाल में उनका पालन करेगी।
यूजीसी कानून पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक को लेकर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि अदालत का जो भी अंतिम आदेश होगा, राज्य सरकार पूरी निष्ठा के साथ उसका अनुपालन करेगी। उनके बयान से यह संकेत मिलता है कि सरकार इस मुद्दे को टकराव की राजनीति के बजाय संवैधानिक दायरे में सुलझाना चाहती है। शिक्षा नीति और विश्वविद्यालयों से जुड़े इस कानून को लेकर देशभर में बहस चल रही है, ऐसे में बिहार सरकार का यह रुख केंद्र और राज्य संबंधों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
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लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार से जुड़े लैंड फॉर जॉब मामले में अदालत द्वारा रोजाना सुनवाई के आदेश पर सम्राट चौधरी ने कहा कि जब कोर्ट ने समयबद्ध सुनवाई का निर्देश दिया है तो निश्चित तौर पर उसी समय सीमा के भीतर पूरे मामले की सुनवाई होगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कानून सभी के लिए समान है और न्यायिक प्रक्रिया में किसी तरह की बाधा नहीं आनी चाहिए। राजनीतिक गलियारों में यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मामला लंबे समय से सुर्खियों में बना हुआ है और विपक्ष लगातार इसे लेकर सरकार पर हमलावर रहा है।
वहीं, अजीत पवार के कथित प्लेन क्रैश मामले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा पूरे प्रकरण की जांच की मांग किए जाने पर सम्राट चौधरी ने संवेदनशील रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि सरकार पूरी तरह से पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है और परिवार जो भी निर्णय लेगा, सरकार उसी के अनुसार आगे बढ़ेगी। इस बयान से यह संदेश गया कि सरकार मानवीय दृष्टिकोण के साथ-साथ पारदर्शिता को भी प्राथमिकता दे रही है।






















