बिहार की सियासत में एक बार फिर ‘वंशवाद’ बनाम ‘लोकतांत्रिक नेतृत्व’ की बहस तेज हो गई है। राज्य के उप-मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary) ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और उसके सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव पर तीखा हमला बोलते हुए पार्टी की आंतरिक संरचना और नेतृत्व शैली पर सवाल खड़े किए हैं। उनके बयान ने न केवल राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है बल्कि आगामी राजनीतिक समीकरणों और चुनावी रणनीतियों को लेकर भी चर्चाएं तेज कर दी हैं।
सम्राट चौधरी ने राजद में नेतृत्व चयन को लेकर आरोप लगाया कि पार्टी में लोकतांत्रिक प्रक्रिया कमजोर है और फैसले परिवार केंद्रित होते जा रहे हैं। तेजस्वी यादव को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि यह निर्णय राजनीतिक योग्यता से ज्यादा पारिवारिक समीकरणों का परिणाम प्रतीत होता है। उनके अनुसार, किसी भी राजनीतिक दल में आंतरिक लोकतंत्र की कमी अंततः संगठन की वैचारिक मजबूती को कमजोर करती है और इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल प्रभावित होता है।
उन्होंने राजद के कार्यकर्ताओं पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि पार्टी में लंबे समय से जुड़े लोग स्वतंत्र राजनीतिक पहचान विकसित करने के बजाय नेतृत्व के प्रति अत्यधिक निर्भरता दिखाते हैं। सम्राट चौधरी का यह बयान उस समय आया है जब राजद के भीतर संगठनात्मक बदलाव और नेतृत्व को लेकर चर्चाएं पहले से ही जारी हैं।
बिहार विधानसभा चुनावों के संदर्भ में उन्होंने दावा किया कि जनता ने राजद की नीतियों को नकारते हुए पार्टी को सीमित सीटों तक समेट दिया, जिसे उन्होंने जन असंतोष का संकेत बताया। राज्य की कानून व्यवस्था पर उठ रहे सवालों के जवाब में उप-मुख्यमंत्री ने बिहार पुलिस की सक्रियता और प्रभावशीलता की सराहना की। उन्होंने दावा किया कि पुलिस की कार्रवाई इतनी सख्त है कि राज्य से बाहर भी अपराधियों में इसका डर दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार, नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार अपराध के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर काम कर रही है और कानून का राज स्थापित करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि विपक्ष का आरोप है कि कानून व्यवस्था को लेकर कई घटनाएं सरकार के दावों पर सवाल खड़े करती हैं, जिससे यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है।






















