बिहार में सत्ता बदली है, जिम्मेदारी बदली है और अब साफ दिख रहा है कि सिस्टम का मूड भी बदला हुआ है। गृह मंत्री की कुर्सी संभालते ही सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary) ने यह संदेश दे दिया है कि अब अपराध और अपराधियों के लिए बिहार की धरती सुरक्षित नहीं रहने वाली। और इसी का नतीजा है कि पटना जिले के टॉप-10 कुख्यात अपराधियों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया गया है।
यह सिर्फ एक सरकारी आदेश नहीं है, यह एक चेतावनी है। यह उन तमाम अपराधियों के लिए अलार्म है, जो सालों से कानून को चुनौती देते आए हैं, पुलिस की आंखों में धूल झोंकते रहे हैं और खुद को सिस्टम से ऊपर समझने लगे थे। लेकिन अब कहानी बदल रही है।
यह पूरा मामला पटना जिले से जुड़ा है। पटना के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में सक्रिय ऐसे अपराधी, जिनका नाम सुनते ही इलाके में दहशत फैल जाती थी, अब पुलिस के रडार पर हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के. शर्मा के अनुरोध पर पटना रेंज के आईजी जितेंद्र राणा ने इन दस कुख्यात अपराधियों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। इन सभी के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, डकैती, रंगदारी और संगठित अपराध जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं।
अब जरा इस सूची को समझिए। यह कोई मामूली नाम नहीं हैं। यह वे चेहरे हैं, जिनका आपराधिक इतिहास सिर्फ एक केस या एक थाना तक सीमित नहीं रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, मोकामा, बाढ़, खुशरूपुर, फतुहा, दनियावां, परसा बाजार, बिक्रम और एयरपोर्ट थाना क्षेत्र जैसे इलाकों में इन अपराधियों की सक्रियता रही है।
इस सूची में पहला नाम है राजेश कुमार उर्फ राजा सिंह, जो मोकामा थाना कांड से जुड़ा हुआ है। दूसरा नाम है सुजीत कुमार उर्फ सुजीत मंडल, जो खुसरूपुर थाना क्षेत्र में दर्ज गंभीर मामलों में वांछित है। तीसरा नाम है अरविंद महतो उर्फ भगत जी, बाढ़ थाना कांड से जुड़ा हुआ। चौथा नाम है संजय कुमार उर्फ संतोष डॉन, खुशरूपुर थाना क्षेत्र का नामी अपराधी, जिसके खिलाफ कई संगीन केस दर्ज हैं। पांचवां नाम है सुजीत कुमार उर्फ बुधार, फतुहा थाना क्षेत्र का जाना-पहचाना चेहरा।
इसके बाद छठा नाम है अविनाश कुमार, जो सालिमपुर थाना कांड से जुड़ा हुआ है। सातवां नाम है दिलीप राय, बिक्रम थाना क्षेत्र का अपराधी। आठवां नाम है राजा नट, परसा बाजार थाना कांड से जुड़ा हुआ। नौवां नाम है रविंद्र गोप, खुशरूपुर थाना क्षेत्र का सक्रिय अपराधी। और दसवां नाम है सहबाज आलम उर्फ परवेज, एयरपोर्ट थाना क्षेत्र का वांछित अपराधी।

पुलिस साफ कह रही है कि यह सिर्फ उन्हीं मामलों की सूची नहीं है, जिनके तहत इनाम घोषित किया गया है। इनके खिलाफ अन्य आपराधिक मामलों का इतिहास भी दर्ज है। यानी ये अपराधी सिर्फ एक-दो केस के नहीं, बल्कि लंबे समय से अपराध की दुनिया में सक्रिय रहे हैं।
अब सवाल उठता है कि अचानक यह सख्ती क्यों? इसका जवाब सीधा है। बिहार सरकार और गृह विभाग अब यह समझ चुका है कि अगर अपराधियों के मन में पुलिस का डर नहीं होगा, तो कानून का राज सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगा। और यही वजह है कि सम्राट चौधरी के निर्देश पर पुलिस को खुली छूट दी गई है कि वो कानून के दायरे में रहते हुए अपराधियों पर कड़ा प्रहार करे।
इनाम घोषित होते ही स्थानीय थाना पुलिस के साथ-साथ स्पेशल टास्क फोर्स यानी STF और विशेष टीमों को भी अलर्ट कर दिया गया है। इन अपराधियों की लोकेशन, मोबाइल मूवमेंट, रिश्तेदारों, सहयोगियों और पुराने नेटवर्क पर लगातार नजर रखी जा रही है। पुलिस सूत्रों की मानें तो कई अपराधियों ने अपने ठिकाने बदलने शुरू कर दिए हैं, कुछ भूमिगत हो गए हैं और कुछ राज्य से बाहर भागने की फिराक में हैं।
सिर्फ इनाम घोषित करना ही इस कार्रवाई का हिस्सा नहीं है। इसके समानांतर पुलिस प्रशासन के भीतर भी कसावट लाई जा रही है। पटना रेंज के आईजी जितेंद्र राणा ने हाल ही में राजगीर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी कार्यालय में एक अहम समीक्षा बैठक की। इस बैठक में नालंदा जिले के अधिकारी, एसडीपीओ राजगीर और विभिन्न थानों के थानाध्यक्ष मौजूद थे।
इस बैठक में आईजी ने साफ शब्दों में कहा कि अब कांड निष्पादन में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लंबित मामलों को लेकर उन्होंने असंतोष जताया और फरवरी के अंत तक लंबित केसों में उल्लेखनीय कमी लाने का लक्ष्य तय किया। संदेश साफ था, या तो काम होगा या कार्रवाई।
आईजी ने निर्देश दिया कि हर थानाध्यक्ष और अंचल निरीक्षक कम से कम पांच-पांच गंभीर मामलों के त्वरित विचारण की निगरानी खुद करें। हत्या, लूट, डकैती जैसे संगीन मामलों में वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी और कुर्की की कार्रवाई 31 जनवरी तक हर हाल में सुनिश्चित की जाए। अवैध शराब के मामलों में जब्त माल को शीघ्र नष्ट करने और साइबर अपराध के मामलों, खासकर कतरीसराय से जुड़े मामलों की विशेष समीक्षा के भी निर्देश दिए गए।
इसके साथ ही बीएनएसएस की धारा 107 के तहत निरोधात्मक कार्रवाई को तेज करने, टॉप-10 इनामी अपराधियों की गिरफ्तारी को प्राथमिकता देने और जेल से छूटे अपराधियों पर कड़ी निगरानी रखने का आदेश भी दिया गया है। बैंक, ज्वेलरी शॉप और अन्य संवेदनशील प्रतिष्ठानों का सुरक्षा ऑडिट कराने को कहा गया है, ताकि अपराध की किसी भी आशंका को पहले ही रोका जा सके।






















