समृद्धि यात्रा (Samriddhi Yatra) के दूसरे चरण में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का मधुबनी आगमन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बिहार के विकास मॉडल का राजनीतिक और प्रशासनिक आकलन बनकर सामने आया। मंच से दिए गए उनके संबोधन में बीते वर्षों की तुलना, वर्तमान उपलब्धियों का ब्योरा और आने वाले समय की रूपरेखा—तीनों एक साथ दिखे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्ता संभालने के बाद से राज्य की प्राथमिकता स्पष्ट रही है—शांति, समावेशी विकास और अवसरों का विस्तार। उनके मुताबिक आज बिहार में अमन-चैन है, जबकि पहले सामाजिक तनाव और विकास की सुस्ती आम बात थी।

नीतीश कुमार ने दावा किया कि सरकार ने समाज के हर वर्ग को साथ लेकर काम किया है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और रोजगार जैसे बुनियादी क्षेत्रों में हुए काम को उन्होंने विकास की रीढ़ बताया। शिक्षक बहाली के आंकड़े गिनाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2023 में बीपीएससी के माध्यम से ढाई लाख से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति हुई और बड़ी संख्या में नियोजित शिक्षक भी सफल हुए। यह शिक्षा व्यवस्था को स्थिरता देने की दिशा में बड़ा कदम है। वहीं मछली उत्पादन में आत्मनिर्भरता को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती से जोड़ा गया।

ऊर्जा और पर्यावरण के मोर्चे पर मुख्यमंत्री ने एक अहम घोषणा करते हुए कहा कि घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे और इसका खर्च सरकार उठाएगी। इससे बिजली बिल का बोझ घटेगा और हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा। रोजगार के सवाल पर नीतीश कुमार ने दोहराया कि अगले पांच वर्षों में एक करोड़ नौकरी और रोजगार देने का लक्ष्य है। जातिगत गणना के बाद चिन्हित 94 लाख जरूरतमंद परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर दो लाख रुपये तक की सहायता देने की बात भी उन्होंने कही, ताकि आर्थिक सशक्तिकरण जमीन पर दिखे।
केंद्र-राज्य तालमेल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार का भरपूर सहयोग मिल रहा है और केंद्रीय बजट में विशेष सहायता ने बिहार की विकास गति को तेज किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री का आभार जताते हुए डबल इंजन सरकार के लाभ गिनाए। साथ ही औद्योगिक निवेश के लिए मुफ्त भूमि और अनुदान, सरकारी चिकित्सकों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक और पांच नए एक्सप्रेसवे के निर्माण जैसी घोषणाओं से यह संकेत दिया कि इंफ्रास्ट्रक्चर और सार्वजनिक सेवाओं में बड़े सुधार आने वाले हैं। राजनीतिक तापमान भी मंच से झलका। बीजेपी सांसद शंभू शरण पटेल ने कांग्रेस पर तीखे हमले किए, जबकि नीतीश कुमार ने लालू यादव पर निशाना साधते हुए पुराने दौर की अव्यवस्था का जिक्र किया।






















