बिहार विधानसभा के स्थापना दिवस के मौके पर जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा (Sanjay Jha on Bihar Vidhan) ने विपक्ष पर सीधा हमला बोला। साथ ही समारोह को राज्य की लोकतांत्रिक परंपरा का प्रतीक बताते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि विधायकों के लिए जिम्मेदारी की याद दिलाने वाला अवसर है। नए चुने गए विधायकों की मौजूदगी को लोकतंत्र की निरंतरता का संकेत बताते हुए संजय झा ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की उपस्थिति को संसदीय गरिमा से जोड़ा।
तेजस्वी यादव द्वारा सरकार के खातों को लेकर लगाए गए चालीस हजार करोड़ रुपये के कथित हिसाब के आरोपों पर संजय झा ने तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि लेखांकन की प्रक्रिया सरकार तय मानकों के अनुसार करती है और रिपोर्ट समय-समय पर सार्वजनिक होती रहती है। उनका तर्क था कि बिना दस्तावेजी आधार के लगाए गए आरोप महज राजनीतिक बयानबाजी हैं। संजय झा ने यह भी सवाल उठाया कि जब अदालतों में चल रहे मामलों पर न्यायिक टिप्पणियां मौजूद हैं, तब विपक्ष को पहले अपने ऊपर लगे आरोपों पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। भूमि के बदले नौकरी जैसे मामलों में अदालत की टिप्पणियों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सार्वजनिक मंच से जवाबदेही तय करने की बजाय कानूनी प्रक्रिया का सम्मान जरूरी है।
JDU में शामिल होते ही तेजस्वी यादव के पूर्व रेयाजुल हक ने फोड़ा ‘बम’.. बोले- 60 नेता छोड़ेंगे RJD
राबड़ी देवी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय झा ने कहा कि आरोप लगाने वालों को सबूत के साथ बात रखनी चाहिए। उन्होंने नीतीश कुमार के दो दशक लंबे शासन को प्रशासनिक स्थिरता का उदाहरण बताया और कहा कि बीते बीस वर्षों में बिहार की कानून व्यवस्था में जो बदलाव आया है, वह राज्य की छवि में आए व्यापक सुधार का प्रमाण है। उनके मुताबिक जब नीतीश कुमार ने सत्ता संभाली थी, तब राज्य की स्थिति अलग थी और आज की तुलना में चुनौतियां कहीं अधिक थीं। संजय झा का दावा रहा कि सरकार ने अपराध पर राजनीतिक संरक्षण नहीं दिया और कानून के तहत कार्रवाई की परंपरा को मजबूत किया। उन्होंने विपक्ष से यह भी पूछा कि क्या वे किसी ऐसे मामले का उदाहरण दे सकते हैं जहां सरकार ने अपराधियों को बचाने की कोशिश की हो।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार और टैरिफ नीति को लेकर उठे सवालों पर संजय झा ने विपक्ष के आरोपों को तथ्यहीन बताया। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यवस्था तेजी से बदल रही है और भारत की नीति किसानों के हितों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। उनके अनुसार पहले से लागू ऊंचे टैरिफ में बदलाव का असर जमीन पर दिख रहा है और निर्यात-आयात संतुलन में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। संजय झा ने यह तर्क दिया कि वैश्विक व्यापार समीकरणों में हो रहे बदलावों के बीच देश को अवसरों का लाभ उठाने की जरूरत है और इसे केवल राजनीतिक चश्मे से देखने से वास्तविक तस्वीर धुंधली हो जाती है।






















