सारण में फाइलेरिया उन्मूलन अभियान की शुरुआत एक अलग ही संदेश के साथ हुई। जब स्वास्थ्य कार्यकर्ता ने दवा देने से पहले जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव की लंबाई (हाइट) मापी, तो यह दृश्य अपने आप में जनता के लिए एक मजबूत भरोसे का प्रतीक बन गया। सभी निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करते हुए जिलाधिकारी ने स्वयं फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन किया और यह स्पष्ट संदेश दिया कि यह अभियान पूरी तरह सुरक्षित है और नियम आम जनता व प्रशासन दोनों के लिए समान हैं। 10 फरवरी से 27 फरवरी तक यह अभियान चलेगा। इसके तहत आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर फाइलेरिया से बचाव की दवा खिलाएंगी।

जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने कहा कि अभियान के सफलता के लिए स्वास्थ्य कर्मियों को विशेष रूप से प्रशिक्षण दिया गया है। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर फाइलेरिया से बचाव की दवा खिलायी जायेगी। उन्होने सभी से अपील करते हुए कहा कि स्वास्थ्य कार्यकर्ता के सामने हीं दवा का सेवन करें और खुद और अपने परिवार को फाइलेरिया जैसी गंभीर बिमारी से सुरक्षित रखें। यह दवा पूरी तरह से सुरक्षित और प्रभावी है।
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40.46 लाखा लाभार्थियों को खिलायी जायेगी फाइलेरिया से बचाव की दवा:
जिलाधिकारी ने बताया कि जिले में 40 लाख 46 हजार 610 लाभार्थियों को फाइलेरिया से बचाव की दवा खिलायी जायेगी। आशा कार्यकर्ता 14 दिनों तक घर-घर जाकर दवा खिलाएंगी। अंतिम तीन दिन बूथ लगाकर दिवा खिलायी जायेगी। सारण में तीन तरह की दवा खिलायी जायेगी। अल्बेंडाजोल, डीईसी और आइवरमेक्टिन दवा खिलायी जायेगी। इस अभियान को सफल बनाने के लिए 2198 टीम, 4396 आशा कार्यकर्ता (ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर) एवं 217 सुपरवाइजर तैनात किए गए हैं। कुल 9 लाख 52 हजार 143 घरों को लक्षित किया जायेगा।अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए 11 फरवरी को मेगा एम.डी.ए. कैंप का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बूथ लगाकर स्वास्थ्यकर्मी अपने सामने लक्षित लाभार्थियों को दवा का सेवन कराएंगे। आंगनबाड़ी केंद्रों पर मेगा कैंप लगेगा।
जागरूकता रथ के माध्यम से किया जायेगा प्रचार प्रसार
इस दौरान जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने हरी झंडी दिखाकर 20 जागरूकता रथ को रवाना किया। सभी प्रखंडों में जागरूकता रथ के माध्यम से गांव-गांव में जाकर ऑडियो के माध्यम से फाइलेरिया से बचाव और दवा सेवन के प्रति जागरूक किया जायेगा। इस मौके पर सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी, डीपीएम अरविन्द कुमार, डीएमओ डॉ. भूपेंद्र कुमार, डीएस डॉ. आरएन तिवारी, डीपीसी रमेशचंद्र कुमार, डीसीएम ब्रजेंद्र कुमार, जिला वेक्टर जनित रोग सलाहकार सुधीर कुमार, अस्पताल प्रबंधक राजेश्वर प्रसाद, वीडीसीओ मिनाक्षी, वीडीसीओ सुमन कुमारी, पिरामल फाउंडेशन से दिलीप मिश्रा, चंदन कुमार, पीयूष, पंकज, सीफार के डीपीसी गनपत आर्यन समेत अन्य मौजूद थे।
फाइलेरिया रोधी दवाएं पूरी तरह सुरक्षित:
सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने कहा कि फाइलेरिया रोधी दवाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। उच्च रक्तचाप, शुगर, गठिया अथवा अन्य सामान्य बीमारियों से ग्रसित व्यक्तियों को भी ये दवाएं अवश्य लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि दवा खाने के बाद मितली, चक्कर या हल्का बुखार जैसे लक्षण दिखाई दें तो यह शुभ संकेत है। इसका अर्थ है कि शरीर में मौजूद फाइलेरिया के परजीवी दवा के प्रभाव से नष्ट हो रहे हैं। किसी भी असुविधा की स्थिति से निपटने के लिए प्रत्येक प्रखंड में रैपिड रिस्पॉन्स टीम तैनात रहेगी।

खाली पेट नहीं खाना है दवा:
अभियान लहलादपुर प्रखंड को छोड़कर शेष सभी प्रखंडों में संचालित किया जाएगा। दवाओं का वितरण नहीं किया जाएगा, बल्कि स्वास्थ्यकर्मी लाभार्थियों को अपने सामने दवा का सेवन कराएंगे। दवा खाली पेट नहीं खानी है। 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएं और अत्यंत गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति इस अभियान से बाहर रखे गए हैं। फाइलेरिया (हाथीपांव रोग) मच्छरों के काटने से फैलने वाली एक गंभीर बीमारी है, जो शरीर के लिम्फैटिक सिस्टम को नुकसान पहुंचाती है। यदि कोई व्यक्ति लगातार 5 वर्षों तक फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन कर लेता है तो उसे जीवनभर फाइलेरिया होने की संभावना समाप्त हो जाती है।
सारण से रॉकी सिंह बजरंगी की रिपोर्ट






















