शंभू गर्ल्स हॉस्टल में छात्रा की संदिग्ध मौत (Shambhu Girls Hostel Case) का मामला अब सिर्फ एक जांच नहीं, बल्कि सिस्टम की कार्यशैली पर उठते सवालों की कहानी बनता जा रहा है। इस रहस्यमयी मौत की परतें खोलने के लिए गठित एसआईटी टीम मंगलवार को मृतका के परिजनों को लेकर गर्दनीबाग अस्पताल पहुँची, जहाँ डीएनए जांच के लिए परिवार के सदस्यों के ब्लड सैंपल एकत्र किए गए। पुलिस सूत्रों के मुताबिक अब तक करीब 11 परिजनों के सैंपल लिए जा चुके हैं, जिनमें भाई, मामा और अन्य नजदीकी रिश्तेदार शामिल हैं।
हालाँकि, इस पूरी प्रक्रिया ने पीड़ित परिवार के दर्द को कम करने के बजाय और गहरा कर दिया है। अस्पताल परिसर में मौजूद मृतका के भाई ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है जैसे न्याय की मांग करना ही अपराध बन गया हो। उनका आरोप है कि पुलिस मुख्य आरोपियों तक पहुँचने के बजाय परिवार को बार-बार जांच के दायरे में खड़ा कर रही है, जिससे वे मानसिक रूप से टूटते जा रहे हैं।
परिजनों का कहना है कि एसआईटी की जांच की दिशा शुरू से ही संदिग्ध रही है। परिवार के एक सदस्य ने गुस्से और बेबसी के साथ सवाल उठाया कि जिन रसूखदार लोगों के नाम इस केस से जोड़े जा रहे हैं, उनसे पूछताछ क्यों नहीं हो रही। उनका यह भी कहना है कि क्या कभी उन प्रभावशाली नामों को रिमांड पर लिया जाएगा या जांच सिर्फ कमजोर पक्ष तक सीमित रहेगी।
लगभग चार घंटे तक चली सैंपल कलेक्शन की प्रक्रिया के बाद एसआईटी टीम सभी नमूनों के साथ अस्पताल से रवाना हो गई। पुलिस का दावा है कि डीएनए रिपोर्ट से वैज्ञानिक साक्ष्य मिलेंगे, जो जांच को निर्णायक दिशा दे सकते हैं। लेकिन परिजनों को इस दावे पर भरोसा नहीं दिख रहा। उनका कहना है कि वे न्याय के लिए लगातार दर-दर भटक रहे हैं और यदि जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।






















