Sheohar News: शिवहर जिले से एक बार फिर सरकारी दफ्तरों में फैले भ्रष्टाचार की तस्वीर सामने आई है। जमीन से जुड़े कामों में आम लोगों को परेशान करने वाले राजस्व कर्मचारियों पर निगरानी विभाग की कार्रवाई ने साफ संदेश दे दिया है कि अब रिश्वतखोरी पर बख्शा नहीं जाएगा। पुरनहिया अंचल कार्यालय में तैनात राजस्व कर्मचारी रामकृत महतो को 10 हजार रुपये की घूस लेते हुए विशेष निगरानी इकाई ने रंगे हाथ दबोच लिया है। आरोप है कि कर्मचारी ने साफ शब्दों में कहा था कि जब तक रिश्वत नहीं मिलेगी, तब तक जमीन की जमाबंदी और नामांतरण का काम आगे नहीं बढ़ेगा।
मामला तब सामने आया जब शिकायतकर्ता विनोद चंद्रवंशी ने निगरानी विभाग से संपर्क किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्व कर्मचारी ने जानबूझकर उनके जमीन के नामांतरण में गड़बड़ी कर दी और उसे सुधारने के एवज में 10 हजार रुपये की मांग करने लगा। शिकायत के मुताबिक, कर्मचारी ने यह भी धमकी दी कि पैसा नहीं देने पर नामांतरण फाइल हमेशा के लिए अटक सकती है।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विशेष निगरानी इकाई ने पहले पूरे मामले का सत्यापन कराया। सत्यापन के दौरान भी आरोपी राजस्व कर्मचारी अपने रुख पर अड़ा रहा और खुले तौर पर कहा कि बिना 10 हजार रुपये लिए वह नामांतरण नहीं करेगा। इसके बाद निगरानी इकाई ने मामला दर्ज कर डीएसपी सुधीर कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया और जाल बिछाया गया।
पूर्व नियोजित रणनीति के तहत जैसे ही रामकृत महतो ने रिश्वत की रकम ली, निगरानी टीम ने उसे मौके पर ही पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद अंचल कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला। फिलहाल आरोपी से पूछताछ की जा रही है और उसे मंगलवार को पटना स्थित निगरानी न्यायालय में पेश किया जाएगा।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब बिहार सरकार जमीन और राजस्व से जुड़े मामलों में सख्त रुख अपनाए हुए है। डिप्टी सीएम सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय सिन्हा लगातार साफ कर चुके हैं कि जमीन बंटवारे, जमाबंदी और नामांतरण जैसे मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भूमि सुधार जनसंवाद कार्यक्रमों के दौरान वे न सिर्फ आम लोगों की शिकायतें सुन रहे हैं, बल्कि अफसरों और कर्मचारियों को भी चेतावनी दे रहे हैं कि गड़बड़ी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई तय है।






















