पटना में आयोजित बिहार ओलंपिक संघ एवं राज्य खेल संघों के भव्य सम्मान समारोह ने रविवार को खेल जगत के माहौल को नया संदेश दिया। भारतीय नृत्य कला मंदिर में हजारों खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और खेल प्रेमियों की मौजूदगी के बीच खेल मंत्री श्रेयसी सिंह (Shreyasi Singh Bihar Sports Samman) को विशेष सम्मान से नवाजा गया। लेकिन इस पूरे आयोजन की चर्चा सिर्फ सम्मान तक सीमित नहीं रही—श्रेयसी सिंह के भावुक संबोधन ने खिलाड़ियों के साथ एक भावनात्मक और पारिवारिक रिश्ता स्थापित कर दिया।
वे महज मंत्री के अधिकारों की भाषा नहीं बोल रही थीं, बल्कि खिलाड़ियों की “बड़ी बहन” की तरह खड़ी होकर उनके संघर्ष और सपनों को अपना कह रही थीं। यही अंदाज़ समारोह की सबसे बड़ी सुर्खी बन गया, जो बिहार के खेल माहौल को नए विजन की तरफ ले जाता दिखा।
समारोह में उन्होंने साफ कहा कि सफलता सिर्फ उन्हीं को मिलती है जो लक्ष्य तय करके अपने प्रयासों में 100% योगदान देते हैं। उन्होंने खिलाड़ियों को आश्वासन दिया कि सरकार की नीतियाँ और खेल संघों की भूमिका तभी सार्थक होगी जब दोनों के बीच प्रभावी समन्वय बने—और यह जिम्मेदारी वे खुद निभाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अपने खेल करियर को याद करते हुए उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में मिले स्वर्ण पदक का जिक्र किया और बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें “Bihar Girl” कहकर पहचान मिली थी। इसे उन्होंने सिर्फ अपनी उपलब्धि नहीं, बल्कि बिहार की बेटियों का गौरव बताया।
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अपने भावुक संबोधन में उन्होंने जमुई का जिक्र करते हुए कहा कि सेवा भाव से काम करना ही उनका असली संकल्प रहा है और आगे भी वे खिलाड़ियों के हर कदम पर साथ रहते हुए यह जिम्मेदारी निभाएंगी। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि विभागीय गलती या लापरवाही की वजह से किसी खिलाड़ी को नुकसान नहीं होना चाहिए। यह संदेश भविष्य की खेल नीतियों की प्राथमिकताओं को साफ करता है—खिलाड़ी पहले, सिस्टम बाद में।
उन्होंने भरोसा जताया कि अगर खिलाड़ियों को सही दिशा और पूरा सहयोग मिले तो बिहार से कई ओलंपियन, खेल रत्न और अर्जुन पुरस्कार विजेता निकल सकते हैं। उनकी यह घोषणा बिहार के खेल भविष्य के लिए एक महत्वाकांक्षी और स्पष्ट रोडमैप की तरह दिखाई दी।





















