दिल्ली के रामलीला मैदान में SIR के खिलाफ कांग्रेस की रैली (SIR Rally) ने राष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर चुनावी सुधार, वोटर लिस्ट और लोकतंत्र की बहस को तेज कर दिया है। लेकिन इस रैली से ज्यादा चर्चा सत्तारूढ़ NDA नेताओं के तीखे जवाबों की हो रही है, जिन्होंने कांग्रेस और राहुल गांधी की रणनीति पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक हताशा का प्रदर्शन करार दिया। बिहार से लेकर दिल्ली तक बयानबाज़ी के जरिए यह साफ संदेश देने की कोशिश की गई कि जनादेश सड़क की राजनीति से नहीं, बल्कि काम और सुशासन से तय होता है।
बिहार सरकार के मंत्री संतोष कुमार सुमन ने कांग्रेस की रैली को सीधे तौर पर ‘नौटंकी’ करार देते हुए कहा कि जब राजनीतिक दलों के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं बचता, तब वे इस तरह के प्रदर्शन करते हैं। उनके बयान का राजनीतिक अर्थ यह है कि SIR जैसे संवेदनशील और संस्थागत मुद्दे पर विरोध की बजाय विपक्ष को आत्ममंथन करना चाहिए। सुमन के अनुसार, ऐसी रैलियों से न तो व्यवस्था पर फर्क पड़ता है और न ही जनता की राय बदलती है, क्योंकि लोग अब नारे नहीं, नतीजे देख रहे हैं।
उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बयान का समर्थन करते हुए संतोष कुमार सुमन ने संपत्ति जब्ती और उसके उपयोग को लेकर भी विपक्ष को घेरा। उन्होंने स्पष्ट किया कि गलत तरीके से अर्जित की गई संपत्ति जब कानूनन सरकार के अधीन आती है, तो उसका सामाजिक उपयोग होना चाहिए। ऐसे में यदि सरकारी संपत्ति पर स्कूल या अन्य जनहित के संस्थान खुलते हैं, तो यह शासन की जवाबदेही और सामाजिक न्याय का उदाहरण है, न कि कोई विवादास्पद कदम।
SIR के खिलाफ में दिल्ली में बड़ी रैली, बिहार कांग्रेस नेताओं का जुटान.. भाजपा पर लगाया बड़ा आरोप
वहीं भाजपा सांसद और वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस, RJD और राहुल गांधी को सीधे चुनौती देते हुए कहा कि उन्हें यह सोचना चाहिए कि जनता उन्हें वोट क्यों नहीं देती। उनके अनुसार, इसका जवाब विकास और सुशासन में छिपा है। रविशंकर प्रसाद ने नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कामों का हवाला देते हुए कहा कि देश की जनता ने बुनियादी ढांचे, आर्थिक सुधार और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती साख को देखा है। इसी वजह से विरोध की राजनीति करने वालों को केवल शिकायतें करने का मौका मिलता है, जनसमर्थन नहीं।
कांग्रेस की रैली के दौरान हुई नारेबाज़ी पर भी भाजपा ने कड़ा रुख अपनाया। रविशंकर प्रसाद ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक विरोध की भी एक मर्यादा होती है। उनका कहना था कि असंयमित भाषा और उग्र नारे न केवल राजनीतिक संस्कृति को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि लोकतांत्रिक संवाद को भी कमजोर करते हैं।
भाजपा नेता ऋतुराज सिन्हा ने इस पूरे घटनाक्रम को राहुल गांधी की राजनीतिक समझ से जोड़ते हुए कहा कि SIR के खिलाफ यह रैली इस बात का संकेत है कि कांग्रेस नेतृत्व देश की राजनीतिक भावना को पढ़ने में असफल रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि बिहार में विपक्ष ने वोटर अधिकार यात्रा के नाम पर लंबा चुनाव प्रचार किया, लेकिन चुनाव संपन्न होने के बाद भी SIR की प्रक्रिया को गलत ठहराने वाला कोई ठोस आधार सामने नहीं आया। ऋतुराज सिन्हा के अनुसार, देश की जनता अब वोटर लिस्ट के शुद्धिकरण को लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक आवश्यक कदम मान चुकी है।






















