Sonepur Mela 2026: छपरा से बिहार की राजनीति और विकास की दिशा में एक साथ कई बड़े संदेश निकलकर सामने आए हैं। समृद्धि यात्रा के तहत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जब सारण पहुंचे, तो यह दौरा सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि आने वाले वर्षों की विकास रूपरेखा का सार्वजनिक एलान बन गया। मंच से लेकर ज़मीन तक, योजनाओं की जो तस्वीर उभरी उसने साफ कर दिया कि 2026 का सोनपुर मेला केवल धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि बिहार की बदली हुई पहचान का प्रतीक बनने जा रहा है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सारण जिले में करीब 451 करोड़ रुपये की योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास कर यह संकेत दिया कि छपरा और आसपास के इलाकों को अब केवल ऐतिहासिक पहचान तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि आधुनिक बुनियादी ढांचे और रोजगार केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा। समृद्धि यात्रा के दौरान उन्होंने उन घोषणाओं की भी समीक्षा की, जो पहले प्रगति यात्रा के समय की गई थीं। यह समीक्षा अपने आप में यह बताती है कि सरकार अब केवल घोषणा नहीं, बल्कि अमल और निगरानी पर ज़ोर दे रही है।
छपरा शहर में एलिवेटेड पथ निर्माण की शुरुआत और चार नए रेल ओवरब्रिज की योजना को ट्रैफिक और कनेक्टिविटी के लिहाज़ से गेमचेंजर माना जा रहा है। इसके साथ ही एकमा से मशरक पथ और खैरा सड़क के चौड़ीकरण से ग्रामीण और शहरी इलाकों के बीच की दूरी सिर्फ किलोमीटर में नहीं, बल्कि समय में भी कम होगी। यही नहीं, छपरा को पांच नए पुलों की सौगात देकर मुख्यमंत्री ने यह संदेश भी दिया कि सारण अब इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में पीछे नहीं रहेगा।
सोनपुर क्षेत्र में बाबा हरिहरनाथ मंदिर परिसर के विकास को लेकर की गई घोषणा का असर सिर्फ धार्मिक पर्यटन तक सीमित नहीं है। माना जा रहा है कि इस क्षेत्र के विकास से सोनपुर मेला 2026 में नए कलेवर में दिखाई देगा। व्यवस्थाएं बेहतर होंगी, सुविधाएं आधुनिक होंगी और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए यह मेला यादगार अनुभव बनेगा। यही वजह है कि इस बार सोनपुर मेले को लेकर उत्साह अभी से दिखने लगा है।
मुख्यमंत्री ने जीविका परियोजना के नए सिलाई घर का उद्घाटन कर महिला सशक्तिकरण को फिर से केंद्र में ला दिया। उन्होंने बताया कि जिले की पांच लाख से अधिक महिलाओं को पहले ही आर्थिक सहायता दी जा चुकी है और आगे भी राशि दी जाएगी। यह केवल वित्तीय मदद नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की रणनीति का हिस्सा है। मुख्यमंत्री ने मंच से यह भी कहा कि बिहार पुलिस में महिलाओं की भागीदारी कई देशों से भी अधिक है, जो महिला आरक्षण और सामाजिक नीतियों का सीधा परिणाम है।
ऊर्जा के मोर्चे पर नीतीश कुमार ने बड़ा विज़न सामने रखा। हर घरेलू उपभोक्ता को 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने के बाद अब लक्ष्य हर घर की छत पर सोलर प्लांट लगाने का है। इसका मतलब साफ है कि आने वाले समय में बिहार ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ेगा और बिजली को लेकर वर्षों पुरानी चुनौतियां इतिहास बनेंगी।
स्वास्थ्य और खेल के क्षेत्र में भी सारण को नई पहचान देने की तैयारी है। सारण सदर अस्पताल को अतिविशिष्ट अस्पताल में बदलने की योजना और खेलों के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना यह दिखाती है कि सरकार केवल सड़क और पुल तक सीमित नहीं, बल्कि मानव संसाधन विकास पर भी समान रूप से ध्यान दे रही है। साथ ही जिले में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना और डेयरी सेक्टर में दुग्ध उत्पादन समितियों के गठन से स्थानीय रोजगार को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
मंच पर राजनीति के रंग भी साफ दिखे। मुख्यमंत्री की मुलाकात उनके पुराने भरोसेमंद साथी बिजेंद्र प्रसाद यादव से हुई, जिसमें वर्षों की राजनीतिक साझेदारी की झलक दिखी। वहीं उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं को जोड़ते हुए विकास की राजनीति का संदेश दिया। बीजेपी सांसद राजीव प्रताप रूडी ने भी मंच से नीतीश कुमार के नेतृत्व की खुले तौर पर सराहना करते हुए भविष्य की राजनीतिक स्थिरता का संकेत दिया।
कुल मिलाकर, सारण की धरती से निकला यह संदेश सिर्फ स्थानीय विकास तक सीमित नहीं है। यह 2026 के सोनपुर मेले से लेकर बिहार के दीर्घकालिक विकास विज़न तक की कहानी कहता है, जहां आस्था, अर्थव्यवस्था और आधारभूत ढांचा एक साथ आगे बढ़ते दिख रहे हैं। यही वजह है कि यह दौरा राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है और विकास के लिहाज़ से भी।






















