पश्चिम बंगाल सरकार को शिक्षक भर्ती घोटाले के मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए राज्य सरकार की याचिका को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पूरे चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता खत्म हो चुकी थी और भर्ती में धोखाधड़ी तथा जालसाजी हुई थी। इस वजह से हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।
सीबीआई द्वारा की गई थी जांच
गौरतलब है कि करीब 25,000 शिक्षकों और स्कूल कर्मचारियों की नौकरी रद्द करने के संबंध में कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के खिलाफ आदेश दिया था। 2016 की इन नियुक्तियों को भ्रष्टाचार के चलते रद्द कर दिया गया था, और इसके साथ ही इन शिक्षकों को उनका वेतन ब्याज समेत लौटाने का निर्देश भी दिया गया था। राज्य सरकार ने इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई की गई। इसके अलावा, इस मामले में 123 अन्य याचिकाओं पर भी सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की।
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पिछले साल, 7 मई को सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी, लेकिन सीबीआई को जांच जारी रखने का आदेश दिया था। कोर्ट ने यह भी कहा था कि नई चयन प्रक्रिया तीन महीने के भीतर पूरी की जानी चाहिए। दिव्यांग उम्मीदवारों की उम्मीदवारी मानवीय आधार पर जारी रखी जाएगी, जबकि अन्य बेदाग उम्मीदवारों को नई चयन प्रक्रिया में भाग लेने का मौका मिलेगा, लेकिन वे अपने चयन के लिए उचित छूट के साथ फिर से आवेदन कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नई चयन प्रक्रिया में बेदाग उम्मीदवारों के लिए भी कुछ छूट हो सकती है, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाएगा कि चयन प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ हो।