फर्जी जज बनकर डीजीपी से पैरवी करने के आरोपों में घिरे आईपीएस आदित्य कुमार की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने आईपीएस को दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश जारी किया है। अगर आदित्य कुमार दो सप्ताह के अन्दर सरेंडर नहीं करते है तो उन्हें आर्थिक अपराध इकाई गिरफ्तार करेगी।
आदित्या कई मामले में है आरोपी
बता दें कि बिहार कैडर के 2011 बैच के आईपीएस आदित्य कुमार पर आरोप है कि पटना उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस के नाम पर बिहार डीजीपी से बात की थी। आईपीएस आदित्य पर अपने ऊपर से केस खत्म कराने, प्रोसिडिंग खत्म कराने और बेहतर पोस्टिंग के लिए अपने दोस्त अभिषेक अग्रवाल को पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बनकर बिहार के तत्कालीन डीजीपी एसके सिंघल को फोन करवाने के आरोप है। बता दें कि आदित्य को फर्जीवाड़ा के जरिए शराब कांड को खत्म करने के मामले में 15 अक्टूबर 2022 को आर्थिक अपराध इकाई ने केस दर्ज किया था। इसके बाद पुलिस मुख्यालय ने आईपीएस को निलंबित कर दिया, और आदित्य कुमार के खिलाफ भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 353 387 419 420 467 468 और 120 बी और धारा 66 सी 66डी के तहत केस दर्ज कराया गया था। आदित्य कुमार पर आरोप था कि पोस्टिंग का अनुचित लाभ प्राप्त करने और अपने खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को खत्म करने की साजिश की थी




















